सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा मीडिया को दी जाने वाली जानकारी (मीडिया ब्रीफिंग) को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि वे पुलिस मीडिया ब्रीफिंग के लिए एक उचित नीति तैयार करें। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस नोंगमीकप्पम कोटेश्वर सिंह की पीठ ने इस संबंध में एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) द्वारा तैयार किए गए “पुलिस मीडिया ब्रीफिंग मैनुअल” को आधार बनाने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह इस मैनुअल को दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करे, ताकि यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो सके।
क्या है पूरा मामला?
यह निर्देश पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य और इससे जुड़े अन्य मामलों में आया है। कोर्ट के समक्ष मुख्य मुद्दा यह था कि पुलिस द्वारा विशेष रूप से चल रही जांच के दौरान मीडिया को जानकारी देने के लिए क्या दिशानिर्देश और तौर-तरीके अपनाए जाने चाहिए।
कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री गोपाल शंकरनारायणन ने एक विस्तृत ‘पुलिस मीडिया ब्रीफिंग मैनुअल’ तैयार किया था। कोर्ट ने अपने आदेश में नोट किया कि यह मैनुअल केंद्र सरकार के विचारों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
कोर्ट की टिप्पणी और राज्यों के रवैये पर नाराजगी
पीठ ने एमिकस क्यूरी श्री गोपाल शंकरनारायणन द्वारा किए गए परिश्रम की सराहना की। हालांकि, इस मुद्दे पर राज्यों के ढुलमुल रवैये को लेकर कोर्ट ने असंतोष व्यक्त किया।
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा:
“इस न्यायालय द्वारा पूर्व में समय दिए जाने के बावजूद, राज्यों ने मैनुअल का संज्ञान लेने और आवश्यक कदम उठाने में पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई है।”
कोर्ट ने कहा कि वह इन मामलों को अब और अधिक समय तक लंबित नहीं रखना चाहता, इसलिए अंतिम निर्देश जारी करना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- नीति का निर्माण: सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे मीडिया ब्रीफिंग के लिए एक उचित नीति विकसित करें। ऐसा करते समय उन्हें एमिकस क्यूरी द्वारा प्रस्तुत पुलिस मीडिया ब्रीफिंग मैनुअल पर विचार करना होगा।
- समय सीमा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर राज्यों को आवश्यक कार्यवाही पूरी करनी होगी।
- वेबसाइट पर अपलोड: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह पुलिस मीडिया ब्रीफिंग मैनुअल को दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करे।
इन निर्देशों के साथ ही कोर्ट ने सभी अपीलों, रिट याचिकाओं और अवमानना याचिका का निपटारा कर दिया।

