सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों की अब देशभर में एक साथ जांच करेगी CBI; AI के इस्तेमाल पर RBI से मांगा जवाब

देश में बढ़ते साइबर अपराधों और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया। शीर्ष अदालत ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) जैसे गंभीर स्कैम से निपटने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को पूरे देश में एक एकीकृत जांच (Unified Pan-India Probe) शुरू करने का आदेश दिया है।

अदालत ने इन अपराधों की हाई-टेक और सीमा पार (cross-border) प्रकृति को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सवाल किया है कि संदिग्ध लेनदेन को पकड़ने और जालसाजों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों को तत्काल फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकों का उपयोग करने में देरी क्यों हो रही है।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्य बागची की खंडपीठ ने यह निर्देश हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपत्ति की शिकायत पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए दिए। कोर्ट ने चिंता जताई कि साइबर अपराधी सुनियोजित तरीके से विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को अपना निशाना बना रहे हैं।

राज्यों की सीमाओं से परे होगी केंद्रीय जांच

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अलग-अलग राज्यों की पुलिस के लिए ऐसे सिंडिकेट्स पर नकेल कसना मुश्किल है जो कई राज्यों और यहां तक कि राष्ट्रीय सीमाओं के पार से संचालित होते हैं। क्षेत्राधिकार (jurisdiction) की जटिलताओं को खत्म करने के लिए, पीठ ने राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे केंद्रीय एजेंसी की जांच में पूर्ण सहयोग करें।

कोर्ट ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना सहित विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्रों में डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच के लिए सीबीआई को आवश्यक सहमति (assent) प्रदान करें। साथ ही, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बेहतर समन्वय के लिए क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय ‘साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर’ स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया है।

READ ALSO  केंद्रीय मंत्री शेखावत की मानहानि शिकायत पर कोर्ट ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को समन भेजा

बैंक अधिकारियों और टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय

अदालत का आदेश केवल जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन वित्तीय और दूरसंचार प्रणालियों पर भी प्रहार किया गया जो अनजाने में इन घोटालों का माध्यम बन रही हैं।

बैंक अधिकारियों की जांच: बैंकिंग प्रणाली में मौजूद खामियों पर सख्त टिप्पणी करते हुए, पीठ ने सीबीआई को उन बैंक अधिकारियों की जांच करने का निर्देश दिया जिन पर जालसाजों के साथ “मिलीभगत” का संदेह है। कोर्ट ने ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts)—वे खाते जो तीसरे पक्ष के नाम पर अवैध धन को इधर-उधर करने के लिए खोले जाते हैं—का जिक्र करते हुए कहा कि बैंक के भीतर से मदद मिले बिना ऐसे खाते संचालित करना मुश्किल है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने सहमति से समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए मॉरीशस की शीर्ष अदालत की सराहना की

आरबीआई को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से जवाब तलब किया है कि जब हजारों करोड़ रुपये की ठगी हो रही है, तो नियामक संस्था (Regulator) एहतियाती कदम क्यों नहीं उठा रही? कोर्ट ने पूछा कि संदिग्ध पैटर्न को पहचानने के लिए एआई (AI) का अनिवार्य उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है।

टेलीकॉम पर सख्ती: दूरसंचार विभाग (DoT) को निर्देश दिया गया है कि सिम कार्ड जारी करने के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने कहा कि सर्विस प्रोवाइडर्स को एक ही यूजर या संस्था को कई सिम कार्ड जारी करने से रोका जाना चाहिए, क्योंकि साइबर अपराधी अक्सर पहचान छिपाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।

विदेशी अपराधियों के लिए इंटरपोल की मदद

अपराध की अंतरराष्ट्रीय प्रकृति को समझते हुए, जहां अपराधी अक्सर विदेशी टैक्स हेवन देशों से रैकेट चलाते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि विदेशों में छिपे आरोपियों को पकड़ने के लिए इंटरपोल (Interpol) की मदद ली जाए।

इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मैसेजिंग ऐप्स—जिनका इस्तेमाल ‘डिजिटल अरेस्ट’ को अंजाम देने के लिए किया जाता है—को जांच के दौरान सीबीआई को पूरा सहयोग देने और आवश्यक जानकारी मुहैया कराने का निर्देश दिया गया है।

READ ALSO  SC Stays Defamation Proceedings Against Rahul Gandhi Over Remarks on Indian Army

मामले की पृष्ठभूमि

इससे पहले, 3 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों पर हैरानी जताई थी। आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में पीड़ितों से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा शिकार बुजुर्ग हुए हैं।

क्या है डिजिटल अरेस्ट? इस अपराध में जालसाज वीडियो कॉल के जरिए खुद को सीबीआई, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) या ईडी का अधिकारी बताते हैं। वे पीड़ितों को डराते हैं कि उनकी पहचान का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है और उन्हें “डिजिटल रूप से बंधक” बना लेते हैं जब तक कि वे पैसे ट्रांसफर नहीं कर देते।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के विचारों को समन्वित कर कोर्ट के सामने एक ठोस रणनीति पेश करने को कहा गया है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है और अदालत इन सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन पर निगरानी रखेगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles