सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर विचार करने का निर्णय लिया, जिसमें राज्य सरकार ने राज्य सरकार के अधीन शराब बिक्री संस्था TASMAC से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी मामले को मद्रास हाईकोर्ट से किसी अन्य राज्य के हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की है। यह याचिका मद्रास हाईकोर्ट में अगली सुनवाई से पहले तत्काल सुनवाई की मांग के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी के माध्यम से दाखिल की गई थी।
संविधान के अनुच्छेद 139A के तहत दायर इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि वह एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट में मामला स्थानांतरित करने का अधिकार उपयोग करे। तमिलनाडु सरकार ने याचिका में यह चिंता जताई है कि इस संवेदनशील मामले की स्थानीय न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष न हो सके, इसलिए इसे राज्य से बाहर स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने याचिका की तात्कालिकता को स्वीकार करते हुए कहा, “हम इसे सूचीबद्ध करेंगे।”

यह घटनाक्रम 25 मार्च के बाद आया है जब मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एम. एस. रमेश और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार ने बिना कोई कारण बताए खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था। इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आदेश दिया था कि वह TASMAC पर की गई छापेमारी में प्रयुक्त एफआईआर और प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ECIR) की प्रति न्यायालय में जमा करे। यह कार्रवाई उन आरोपों की जांच का हिस्सा है, जिनमें डिस्टिलरी कंपनियों और अवैध भुगतान से जुड़े गंभीर वित्तीय घोटालों का उल्लेख है।
हाईकोर्ट ने अंतरिम रूप से यह मौखिक आदेश भी दिया था कि जब तक अगली सुनवाई न हो, तब तक ED TASMAC के मुख्यालय में कोई और कार्रवाई न करे।
TASMAC ने अपनी याचिका में कहा है कि ED की जांच की प्रक्रिया, उसका दायरा और तरीका राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप के समान है, जो संघीय ढांचे के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके कर्मचारियों को “जांच के नाम पर उत्पीड़न” से बचाया जाना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि इस मामले को तमिलनाडु से बाहर किसी अन्य हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जाए या नहीं।