सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में तदर्थ (Ad-hoc) जजों की नियुक्ति पर दिशानिर्देश जारी किये

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 224A के तहत उच्च न्यायालय में एड-हॉक जजों की नियुक्ति के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए। 

सीजेआई एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने लोक प्रहरी बनाम भारत संघ मामले में यह आदेश दिया 

लोक प्रहरी, एक एनजीओ है, जिसने अनुच्छेद 224A के तहत उच्च न्यायालयों में मामलों के शीघ्र निपटान के लिए एडहॉक जजों की नियुक्ति की मांग करते हुए अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अनुच्छेद 224 ए के तहत न्यायाधीशों की तदर्थ नियुक्ति नियमित नियुक्ति का विकल्प नहीं होगी। साथ ही यह नियुक्ति नियमित रिक्तियों के विरुद्ध नहीं होगी। तदर्थ न्यायाधीशों के वेतन का भुगतान भारत के समेकित कोष (consolidated fund) से किया जाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश आपराधिक, नागरिक, कॉर्पोरेट आदि जैसे विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित बहुत पुराने मामलों की पेंडेंसी से निपटने के लिए तदर्थ रूप से सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं

मामला अगले चार महीनों के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा। कानून और न्याय मंत्रालय को प्रगति के संबंध में तब तक एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। 

कोर्ट ने तदर्थ जजों की नियुक्ति के लिए गाइडलाइंस तैयार की हैं, जिसे  कोर्ट की वेबसाइट पर जजमेंट अपलोड होते ही जल्द ही अपडेट किया जाएगा

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