एससीबीए अध्यक्ष ने सीजेआई को लिखा पत्र, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड संघ पर सीमा से बाहर जाने का आरोप

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर टकराव सामने आया है। एससीबीए के अध्यक्ष विकास सिंह ने बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि एससीओआरए अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे मुद्दों पर बात कर रहा है जो सिर्फ एससीबीए के अधीन आते हैं।

बुनियादी ढांचे और बार से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप का आरोप

विकास सिंह ने अपने पत्र में कहा कि हाल के समय में एससीओआरए ने सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ताओं से जुड़ी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विषयों पर संवाद जारी किया है, जबकि ये विषय केवल एससीबीए के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने लिखा, “इन विषयों पर संचार एससीओआरए के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया गया है, जबकि यह केवल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का विशेष अधिकार क्षेत्र है।”

एससीबीए का व्यापक प्रतिनिधित्व का दावा

विकास सिंह ने बताया कि एससीबीए के कुल 22,734 सदस्य हैं, जिनमें 10,013 स्थायी और 12,309 अस्थायी सदस्य शामिल हैं। इनमें 906 वरिष्ठ अधिवक्ता, एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड और लगभग 19,000 गैर-एओआर अधिवक्ता हैं।

इसके विपरीत, सुप्रीम कोर्ट में कुल 3,786 एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड पंजीकृत हैं, जिनमें से केवल लगभग 3,000 ही एससीओआरए के सदस्य हैं। सिंह ने लिखा, “इस स्थिति में, एससीओआरए सुप्रीम कोर्ट के सभी एओआर का प्रतिनिधित्व भी नहीं करता।”

बायोमेट्रिक एंट्री प्रस्ताव पर आपत्ति

एससीओआरए द्वारा हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री को भेजे गए बायोमेट्रिक एंट्री संबंधी प्रस्ताव पर भी एससीबीए अध्यक्ष ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “ऐसा कोई प्रश्न ही नहीं उठता कि बार के सदस्य स्वेच्छा से इतनी विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को सौंपें।”

हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुरक्षा कारणों से ऐसा कोई निर्देश आता है और इस पर एससीबीए से चर्चा की जाती है, तो बार पूर्ण सहयोग करेगा।

संस्था में अनुशासन और एकजुटता की आवश्यकता पर बल

विकास सिंह ने कहा कि यह पत्र संस्था में समन्वय, अनुशासन और टकराव की स्थितियों से बचने के उद्देश्य से लिखा गया है। उन्होंने लिखा, “बार के भीतर एकीकृत स्वर को बढ़ावा देना और संस्थागत एकता एवं बार और बेंच के बीच सामंजस्य बनाए रखना आवश्यक है।”

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अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में नियमित रूप से अभ्यास करने वाले अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व केवल एससीबीए करता है और एससीओआरए को केवल एओआर से संबंधित विषयों तक सीमित रहना चाहिए।

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