सुप्रीम कोर्ट ने M3M समूह को अनंतिम रूप से अटैच की गई संपत्ति के स्थान पर दूसरी संपत्ति देने की अनुमति दी, ईडी की शर्तों के अधीन

सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट समूह M3M को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत अनंतिम रूप से अटैच की गई संपत्ति के स्थान पर दूसरी संपत्ति देने की अनुमति दे दी है, बशर्ते कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रस्तावित सख्त शर्तों का पूर्ण पालन किया जाए।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया जिसमें M3M समूह ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें संपत्ति के प्रतिस्थापन की अनुमति नहीं दी गई थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, जो M3M इंडिया प्रा. लि. और M3M इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. की ओर से पेश हुए, उन्होंने बताया कि कंपनियों ने ईडी द्वारा प्रस्तावित शर्तों का पालन करने के लिए सहमति दी है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर हलफनामे को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्थापन की अनुमति दी, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से शर्तों के अधीन रखा।

ईडी की प्रमुख शर्तों में से एक यह है कि M3M समूह को प्रस्तावित वैकल्पिक संपत्तियों पर “स्पष्ट और बाजार में विक्रय योग्य स्वामित्व” तथा “निर्विवाद मालिकाना हक” स्थापित करना होगा, जिसे सत्यापन योग्य दस्तावेजों द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए। प्रस्तावित संपत्तियां किसी भी प्रकार के ऋण, बंधक, गिरवी या तीसरे पक्ष के दावे से मुक्त होनी चाहिए।

इसके अतिरिक्त, कंपनी को एक शपथपत्र देना होगा जिसमें यह उल्लेख हो कि प्रतिस्थापित संपत्ति को मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान न तो बेचा जाएगा, न ही हस्तांतरित या किसी अन्य रूप में विचलित किया जाएगा।

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पीठ ने कहा: “जबकि हम प्रतिस्थापन की अनुमति देते हैं… यह अनुमति निर्धारित शर्तों के अधीन होगी।”

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