राष्ट्रीय राजधानी में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (Forest Research Institute – FRI) को उसके कार्ययोजना बजट का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान की पीठ ने बजट में कुछ प्रस्तावित खर्चों को अत्यधिक बताते हुए यह निर्देश दिया।
न्यायालय ने सुझाव दिया कि एफआरआई, बजट प्रस्ताव को संशोधित करने में नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) की सहायता ले सकता है और अगले एक महीने के भीतर संशोधित बजट दिल्ली सरकार को सौंपे। पीठ ने परियोजना के पहले चरण की शीघ्र शुरुआत की आवश्यकता पर बल देते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि जैसे ही संशोधित बजट प्राप्त हो, तत्काल आवश्यक निधि जारी की जाए, ताकि किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने ‘दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994’ के तहत ‘वृक्ष’ की परिभाषा में अस्पष्टता पर भी चिंता जताई। इस पर कोर्ट ने एफआरआई को निर्देश दिया कि वह इस संदर्भ में भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) द्वारा दी गई परिभाषा को अपनाए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो।

कोर्ट ने योजना के प्रस्तावित समय-सीमा की भी समीक्षा की और कहा कि पहले चरण के लिए निर्धारित 15 महीने की अवधि कुछ अधिक प्रतीत होती है। एफआरआई को निर्देश दिया गया कि वह वृक्ष गणना (tree census) की प्रक्रिया में तेजी लाए। इसी प्रकार, तीसरे चरण के लिए तय की गई 24 महीने की अवधि को भी घटाने पर विचार करने को कहा गया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को एफआरआई को दिल्ली के हरित कवर को बढ़ाने की कार्य योजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इससे पहले भी कोर्ट ने दिल्ली में घटते हरित क्षेत्रों, बढ़ते तापमान और नागरिकों पर उसके प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार और नगर निकायों को व्यापक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।