सुप्रीम कोर्ट ने एयरपोर्ट उल्लंघन मामले में भाजपा सांसदों के खिलाफ एफआईआर रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें झारखंड हाई कोर्ट के उस फैसले को पलटने की मांग की गई थी जिसमें भाजपा सांसदों निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी के खिलाफ एफआईआर रद्द कर दी गई थी। एफआईआर में सांसदों पर अनधिकृत एयरपोर्ट गतिविधियों का आरोप लगाया गया था, जिसमें विशेष रूप से देवघर एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल स्टाफ को अगस्त 2022 में आधिकारिक सूर्यास्त के बाद अपने विमान को उड़ान भरने की अनुमति देने के लिए मजबूर करना शामिल था।

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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस ओका और जस्टिस मनमोहन ने राज्य की अपील को खारिज करते हुए झारखंड सरकार को विमान अधिनियम के तहत निर्दिष्ट प्राधिकरण को एकत्रित जांच सामग्री जमा करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। इसके बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) यह निर्धारित करेगा कि इन निष्कर्षों के आधार पर अधिनियम के तहत औपचारिक शिकायत दर्ज करने की आवश्यकता है या नहीं।

यह विवाद कुंडा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से शुरू हुआ, जिसमें कहा गया था कि सांसदों और सात अन्य ने एटीसी कर्मियों को अपने चार्टर्ड विमान को स्वीकृत समय के बाद उड़ान भरने के लिए मजबूर किया, जिससे स्थापित एयरपोर्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ। हाईकोर्ट ने पहले लोकसभा सचिवालय से पूर्व मंजूरी न मिलने का हवाला देते हुए एफआईआर को रद्द कर दिया था, जो संसद सदस्यों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए विमान (संशोधन) अधिनियम, 2020 के तहत आवश्यक है।

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