बजट सत्र बुलाने से राज्यपाल के इनकार के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट 3 मार्च को होने वाले बजट सत्र को बुलाने के राज्यपाल के “इनकार” के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमत हो गया।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि वह महाराष्ट्र शिवसेना राजनीतिक संकट पर पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ की सुनवाई के बाद दोपहर 3:50 बजे पंजाब सरकार की याचिका पर विचार करेगी।

पंजाब सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने याचिका पर मंगलवार को ही तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि अगर दिन में 10 मिनट के लिए मामले की सुनवाई की जाती है तो संविधान पीठ की सुनवाई प्रभावित नहीं होगी।

पीठ ने सिंघवी से कहा कि वह संविधान पीठ के समक्ष जिरह करेंगे और इसलिए वह अपराह्न 3.50 बजे याचिका पर सुनवाई करेगी।

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच विवाद पिछले हफ्ते खराब हो गया था, पुरोहित ने संकेत दिया था कि उन्हें विधानसभा का बजट सत्र बुलाने की कोई जल्दी नहीं है, और सीएम को राजभवन के एक पत्र पर उनकी “अपमानजनक” प्रतिक्रिया के बारे में याद दिलाया।

सीएम मान को पुरोहित का पत्र पंजाब कैबिनेट द्वारा 3 मार्च से विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला करने और राज्यपाल से सदन बुलाने का अनुरोध करने के दो दिन बाद आया था।

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अपने ताजा पत्र में पुरोहित ने मान से कहा था कि वह बजट सत्र आहूत करने के बारे में तभी फैसला करेंगे जब मुख्यमंत्री के पिछले पत्र में उठाए गए मुद्दों पर मुख्यमंत्री के जवाब पर कानूनी सलाह ली जाएगी.

13 फरवरी के उस पत्र में, गवर्नर ने मान से सिंगापुर में हाल ही में आयोजित एक प्रशिक्षण संगोष्ठी के लिए 36 सरकारी स्कूल प्रधानाध्यापकों के चयन की प्रक्रिया की व्याख्या करने के लिए कहा था, साथ ही अन्य मुद्दों को भी उठाया था।

मान ने जवाब दिया था कि वह केवल तीन करोड़ पंजाबियों के प्रति जवाबदेह थे, केंद्र द्वारा नियुक्त राज्यपाल के प्रति नहीं और राज्यपालों की नियुक्ति के लिए केंद्र के मानदंड पर भी सवाल उठाया था।

पुरोहित ने मान के जवाब को न केवल “स्पष्ट रूप से असंवैधानिक बल्कि बेहद अपमानजनक” भी कहा था, यह कहते हुए कि उन्हें कानूनी सलाह लेने के लिए मजबूर किया गया था।

पुरोहित ने नए पत्र में कहा, “चूंकि आपका ट्वीट और पत्र दोनों न केवल स्पष्ट रूप से असंवैधानिक हैं, बल्कि बेहद अपमानजनक भी हैं, इसलिए मैं इस मुद्दे पर कानूनी सलाह लेने के लिए मजबूर हूं। कानूनी सलाह लेने के बाद ही मैं आपके अनुरोध पर निर्णय लूंगा।” .

पुरोहित ने 13 फरवरी को एक प्रशिक्षण संगोष्ठी के लिए विदेश यात्रा के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापकों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें “कदाचार और अवैधताओं” की शिकायतें मिली हैं।

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उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की ‘अवैध’ नियुक्ति और कथित कदाचार के आरोप में हटाए गए आईपीएस अधिकारी की पदोन्नति समेत अन्य मुद्दों को भी उठाया था।

यह दावा करते हुए कि मान ने पूर्व में उनके पत्रों का “जवाब देने की कभी परवाह नहीं की”, पुरोहित ने मुख्यमंत्री से कहा था कि लोगों ने उन्हें राज्य चलाने के लिए उनकी “सनक और पसंद” के अनुसार नहीं चुना और संविधान के अनुसार, वह ” राजभवन द्वारा मांगी गई कोई भी सूचना प्रस्तुत करने के लिए बाध्य है।

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राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से एक पखवाड़े के भीतर उनके पत्र का जवाब देने को कहा था, जिसमें विफल रहने पर वह आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी सलाह लेंगे।

पिछले साल भी पंजाब विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर राज्यपाल और आप सरकार के बीच तकरार हुई थी।

राज्यपाल ने 22 सितंबर को कानूनी राय लेने के बाद विशेष सत्र आयोजित करने की अनुमति वापस ले ली थी, जब आप सरकार केवल सदन में विश्वास प्रस्ताव लाना चाहती थी।

बाद में, सरकार द्वारा विधायी व्यवसाय का विवरण प्रदान करने के बाद ही राज्यपाल ने अपनी सहमति दी।

अक्टूबर में, राज्यपाल पुरोहित ने फरीदकोट के बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में कुलपति पद के लिए आप सरकार की पसंद को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था।

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