2007 रामपुर CRPF कैंप हमले में बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ यूपी सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के रामपुर CRPF कैंप आतंकी हमले मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा चार दोषियों की फांसी और एक की उम्रकैद की सजा को रद्द किए जाने को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने पांचों आरोपियों को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2007 रामपुर CRPF कैंप हमले से जुड़े मामले में पांच आरोपियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उत्तर प्रदेश सरकार की उस अपील पर जारी किया गया है, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को गंभीर धाराओं से बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है।

READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट: केवल अनुमानों के आधार पर ट्रिब्यूनल विशेषज्ञ की दिव्यांगता आकलन को कम नहीं कर सकता

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार की अपील पर विचार करते हुए कहा कि मामला सुनवाई योग्य है और इसे चार सप्ताह बाद सुना जाएगा। अदालत ने मोहम्मद शरीफ, साबाउद्दीन, इमरान शहज़ाद, मोहम्मद फारूक और जंग बहादुर खान को नोटिस जारी किया है। इनकी ओर से अधिवक्ता एम. एस. खान पेश हुए।

31 दिसंबर 2007 की रात को उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित CRPF ग्रुप सेंटर पर हमला किया गया था, जिसमें आठ जवानों की मौत हो गई थी और पांच घायल हुए थे। इस आतंकी हमले ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को हिला कर रख दिया था।

READ ALSO  Justice L. Nageswara Rao to join the Supreme Court Collegium on 13th August

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में चार आरोपियों को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इन सज़ाओं को चुनौती दी गई थी, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 अक्टूबर 2023 को फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए सभी पांचों आरोपियों को हत्या और अन्य गंभीर आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मुख्य अपराध साबित करने में “बुरी तरह विफल” रहा।

READ ALSO  Supreme Court Delivers Split Verdict on Validity of Section 17A of Prevention of Corruption Act; Matter Referred to CJI

हालांकि, पांचों को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-A) के तहत दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है और पहले दिए गए मृत्युदंड और उम्रकैद के आदेशों को बहाल करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर विचार करते हुए नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles