अस्पताल दर सूची प्रदर्शित करने संबंधी केरल हाईकोर्ट दिशानिर्देशों को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने हेतु एक सप्ताह का समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल सरकार को एक सप्ताह का समय दिया ताकि वह उस याचिका पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल कर सके जिसमें केरल हाईकोर्ट द्वारा जारी उन दिशानिर्देशों को चुनौती दी गई है, जिनमें क्लिनिकल प्रतिष्ठानों को सेवाओं और पैकेज दरों की सूची प्रमुखता से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता द्वारा समय मांगने पर पारित किया। पीठ ने याचिकाकर्ताओं — केरल प्राइवेट हॉस्पिटल्स एसोसिएशन और हुसैन कोया थंगल — को राज्य के प्रत्युत्तर के बाद दो सप्ताह के भीतर rejoinder दाखिल करने की अनुमति भी दी।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि 16 दिसंबर 2025 को पारित उसका अंतरिम आदेश, जिसके तहत एसोसिएशन के सदस्यों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया गया था, अगली सुनवाई की तिथि 24 मार्च तक प्रभावी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में उस याचिका पर नोटिस जारी किया था जिसमें केरल हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 26 नवंबर 2025 को एकल न्यायाधीश के आदेश के विरुद्ध दायर अपीलों को खारिज करते हुए केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स अधिनियम, 2018 और नियम, 2018 के विभिन्न प्रावधानों को वैध ठहराया था।

खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के 23 जून के आदेश को बरकरार रखते हुए अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए थे।

READ ALSO  HC Judges Appointment: 23 Names Pending With Government- Know Details

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि प्रत्येक क्लिनिकल प्रतिष्ठान:

  • अपने रिसेप्शन या प्रवेश काउंटर तथा आधिकारिक वेबसाइट पर मलयालम और अंग्रेजी में उपलब्ध सेवाओं की सूची और सामान्य प्रक्रियाओं की बेसलाइन व पैकेज दरें प्रमुखता से प्रदर्शित करे।
  • यह स्पष्ट उल्लेख करे कि किसी अप्रत्याशित जटिलता या अतिरिक्त प्रक्रिया की लागत अलग से मदवार बताई जाएगी।
  • एक शिकायत निवारण डेस्क या हेल्पलाइन स्थापित करे तथा प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट संदर्भ संख्या के साथ दर्ज कर तत्काल एसएमएस, व्हाट्सएप या भौतिक रूप में प्राप्ति रसीद जारी करे।
  • प्रदर्शित दर सूची, पुस्तिकाओं और वेबसाइट की जानकारी को अद्यतन रखे तथा किसी भी परिवर्तन की स्थिति में संशोधन की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित करे।
READ ALSO  Delhi High Court Halts Registration of 'Jack Daniel's' Trademark by Another Company

हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि इन दिशानिर्देशों का अनुपालन न करने पर अधिनियम के तहत पंजीकरण निलंबन या रद्द करने तथा दंडात्मक कार्रवाई सहित नियामकीय कदम उठाए जा सकते हैं, साथ ही मरीजों को उपलब्ध अन्य सिविल, आपराधिक या संवैधानिक उपचार भी प्रभावित नहीं होंगे।

याचिकाकर्ताओं ने उपचार मदवार शुल्क और पैकेज दरों के प्रकाशन की बाध्यता सहित अधिनियम और नियमों के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है।

मामले में अब राज्य के प्रत्युत्तर और याचिकाकर्ताओं के rejoinder के बाद 24 मार्च को आगे सुनवाई होगी। तब तक एसोसिएशन के सदस्यों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

READ ALSO  Kerala court sentences 65-yr-old man to 7 years RI for sexual assault of 4-year-old girl
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles