सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आधिकारिक रूप से दिल्ली हाईकोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा का स्थानांतरण उनके मूल न्यायालय इलाहाबाद हाईकोर्ट में करने की सिफारिश की है। यह फैसला 20 मार्च 2025 को लिया गया, जो उस समय आया है जब जस्टिस वर्मा के निवास पर आग लगने की घटना के बाद बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने को लेकर जांच चल रही है।

स्थानांतरण की पृष्ठभूमि
दिल्ली हाईकोर्ट में कॉलेजियम के सदस्य और वरिष्ठता में दूसरे स्थान पर रहे जस्टिस यशवंत वर्मा, इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरण के बाद वरिष्ठता में नौवें स्थान पर होंगे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रस्ताव में स्थानांतरण के स्पष्ट कारण नहीं बताए गए हैं, जिससे इस फैसले की समय-सीमा और इसके निहितार्थ को लेकर कई अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नकदी बरामदगी की जांच के लिए शुरू की गई इन-हाउस जांच से स्वतंत्र है।

मामले की पूरी जानकारी
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के निवास पर आग लगने के बाद दमकलकर्मियों ने लगभग ₹15 करोड़ की अवैध नकदी बरामद की। घटना के समय जस्टिस वर्मा शहर से बाहर थे और उनके परिवार के सदस्यों ने आग लगने की सूचना दी थी। इस घटना की जानकारी मिलते ही भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इस पर चर्चा के लिए एक आपात बैठक बुलाई।
वर्तमान में, जस्टिस वर्मा से सभी न्यायिक कार्य वापस ले लिए गए हैं और उनके खिलाफ नकदी से जुड़े आरोपों की जांच जारी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक सर्कुलर जारी कर उनके न्यायिक कार्यों से अलग किए जाने की पुष्टि की है, जब तक कि आगे की जांच पूरी नहीं हो जाती।