पेटेंट अधिकारों से जुड़ी प्रतिस्पर्धा विरोधी शिकायतों की जांच पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार; NCLAT के आदेश के कुछ हिस्से पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) के एक आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगाते हुए यह तय करने का निर्णय लिया है कि क्या प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को पेटेंट अधिकारों के प्रयोग से उत्पन्न प्रतिस्पर्धा विरोधी आचरण की शिकायतों की जांच करने का अधिकार है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस अपील में केवल अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) से संबंधित प्रश्न पर विचार करेगी और मामले की मेरिट में नहीं जाएगी।

यह मामला स्विस फार्मास्युटिकल कंपनी Vifor International AG की एक पेटेंट दवा ‘Ferric Carboxymaltose (FCM)’ से जुड़ा है। वर्ष 2022 में CCI ने इस संबंध में दायर एक प्रतिस्पर्धा शिकायत को मेरिट पर खारिज कर दिया था। हालांकि, अपीलीय ट्राइब्यूनल ने न केवल CCI के आदेश को बरकरार रखा, बल्कि यह भी कहा कि पेटेंट अधिकारों के प्रयोग से जुड़ी प्रतिस्पर्धा शिकायतों की जांच का अधिकार CCI को है ही नहीं।

NCLAT ने यह निष्कर्ष Competition Act, 2002 की धारा 3(5) और दिल्ली हाईकोर्ट के Ericsson और Monsanto मामलों में दिए गए फैसले पर आधारित रखा। ट्राइब्यूनल ने कहा कि जहां विवाद पेटेंट के प्रयोग से जुड़ा हो, वहां Patents Act, 1970 ही लागू होता है, न कि Competition Act।

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मामले का केंद्रबिंदु यह है कि जब कोई कंपनी पेटेंट अधिकारों का प्रयोग करते हुए किसी प्रकार का दुरुपयोग (जैसे अत्यधिक रॉयल्टी वसूलना या अनावश्यक शर्तें लगाना) करती है, तो क्या उस आचरण की जांच CCI कर सकती है?

NCLAT का कहना था कि Patents Act इस प्रकार के विवादों के लिए एक पूर्ण विधिक ढांचा (complete code) है और इसलिए Competition Act की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के इस स्पष्ट निष्कर्ष पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा कि वह इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या CCI के पास ऐसे मामलों में अधिकार क्षेत्र है या नहीं।

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पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका विचार केवल अधिकार क्षेत्र तक सीमित रहेगा और वह प्रतियोगिता विवाद की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी।

  • Ericsson मामला: मोबाइल कंपनियों Micromax और Intex ने आरोप लगाया था कि Ericsson ने standard essential patents के लिए अत्यधिक रॉयल्टी की मांग की। CCI ने जांच शुरू की थी, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया।
  • Monsanto मामला: कुछ बीज कंपनियों ने आरोप लगाया था कि Monsanto ने अपने जेनेटिकली मॉडिफाइड कपास बीजों के लिए अत्यधिक रॉयल्टी वसूलते हुए पेटेंट अधिकारों का दुरुपयोग किया। दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने CCI की जांच पर रोक लगा दी थी।
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इन दोनों मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि Patents Act इन विवादों को हल करने के लिए पर्याप्त है और इसके चलते Competition Act लागू नहीं होता।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा Vifor मामले में लिए गए रुख से यह स्पष्ट है कि वह पेटेंट और प्रतिस्पर्धा कानून के टकराव से जुड़े इस जटिल मुद्दे पर पुनर्विचार करेगा — जिसका प्रभाव फार्मा, टेलीकॉम और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।

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