पिछली मध्यस्थता कार्रवाई छोड़ने के बाद नई धारा 11 याचिका विचारणीय नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पक्षकार मध्यस्थता (Arbitration) की कार्यवाही को बीच में ही छोड़ देता है, तो वह उसी विवाद के लिए आर्बिट्रेशन एंड कॉनसिलीएशन एक्ट, 1996 की धारा 11 के तहत नया आवेदन दायर नहीं कर सकता। कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें एक नया मध्यस्थ नियुक्त किया गया था। कोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 23 नियम 1 के सिद्धांत, जो बिना अनुमति के नई कार्यवाही शुरू करने पर रोक लगाते हैं, सार्वजनिक नीति (Public Policy) के रूप में धारा 11 के आवेदनों पर भी लागू होते हैं।

जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि यदि पहली याचिका वापस लेते समय या कार्यवाही छोड़ते समय अदालत से दोबारा याचिका दायर करने की अनुमति (Liberty) नहीं ली गई है, तो दूसरा आवेदन वर्जित है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद राजीव गद (अपीलकर्ता) और सुबोध प्रकाश (प्रतिवादी) के बीच होशियारपुर, पंजाब में 550 मरला भूमि की नीलामी से जुड़ा है। इस संयुक्त उद्यम के प्रबंधन के लिए दोनों पक्षों ने 2 अप्रैल, 2013 को तीन समझौते किए थे, जिसमें विवाद समाधान के लिए मध्यस्थता खंड (क्लॉज 6) शामिल था।

प्रतिवादी ने सबसे पहले 2015 में मध्यस्थता शुरू की थी। कई मध्यस्थों की नियुक्ति और उनके हटने के बाद, 2017 में जस्टिस आफताब आलम को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया गया। हालांकि, कार्यवाही में शामिल न होने और पक्षपात के आरोप लगाने के बाद, प्रतिवादी ने 29 अगस्त, 2019 को एक ईमेल भेजकर स्पष्ट किया कि वह अब कार्यवाही में भाग नहीं लेगा। मध्यस्थ ने 30 जून, 2020 को एक आदेश पारित किया जिसमें प्रतिवादी के दावों को खारिज कर दिया गया, हालांकि उसे दावे को पुनर्जीवित करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था, जिसका उसने उपयोग नहीं किया।

READ ALSO  Supreme Court Collegium Recommends Transfer of Two High Court Judges; Rejects One Request

इसके बाद, प्रतिवादी ने 1 सितंबर, 2021 को एक नया मध्यस्थता नोटिस जारी किया। उसने तर्क दिया कि जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीलामी को वैध ठहराने वाले एक अन्य फैसले के बाद उसे “नया कारण” (Fresh Cause of Action) प्राप्त हुआ है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 8 नवंबर, 2024 को प्रतिवादी की धारा 11 याचिका स्वीकार कर ली, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

पक्षों के तर्क

अपीलकर्ता की ओर से: अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि प्रतिवादी ने स्पष्ट रूप से पिछली मध्यस्थता को छोड़ दिया था, इसलिए वह नई नियुक्ति की मांग करने से कानूनी रूप से वर्जित है। उन्होंने HPCL Bio-Fuels Ltd. v. Shahaji Bhanudas Bhad मामले का हवाला देते हुए कहा कि CPC का आदेश 23 नियम 1(3) बिना अदालती अनुमति के उसी विवाद पर दोबारा कार्यवाही करने से रोकता है।

READ ALSO  हाई कोर्ट ने गर्भपात और मानवीय आधारों को ध्यान में रखते हुए जजों के खिलाफ सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने की आरोपी महिला को जमानत दी

प्रतिवादी की ओर से: प्रतिवादी ने तर्क दिया कि धारा 11 के चरण में ‘रेस ज्यूडिकाटा’ (Res Judicata) के मुद्दे की जांच नहीं की जा सकती। उन्होंने दलील दी कि नीलामी की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले ने उन्हें कार्रवाई का एक नया आधार प्रदान किया है। उन्होंने Indian Oil Corporation Limited v. SPS Engineering Limited के फैसले पर भरोसा जताया।

न्यायालय का विश्लेषण और टिप्पणियां

कोर्ट ने पाया कि यद्यपि धारा 11 का क्षेत्राधिकार मुख्य रूप से मध्यस्थता समझौते के अस्तित्व का पता लगाने तक सीमित है, लेकिन कार्यवाही को छोड़ने (Abandonment) का सिद्धांत महत्वपूर्ण है। प्रतिवादी के आचरण पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा:

“प्रतिवादी द्वारा 29.08.2019 को मध्यस्थ को भेजे गए संचार से, जिसमें उसने सूचित किया था कि वह कार्यवाही में भाग नहीं लेगा, यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी ने कार्यवाही छोड़ दी थी।”

पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि CPC के आदेश 23 नियम 1 में निहित प्रतिबंध सार्वजनिक नीति पर आधारित है। कोर्ट ने कहा:

“किसी भी वादकारी को उसी वाद-हेतुक (Cause of Action) पर दोबारा नई कार्यवाही शुरू करके अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। संहिता के आदेश 23 नियम 1 में निहित प्रतिबंध, जो अधिनियम की धारा 11 की कार्यवाही पर लागू होता है, सार्वजनिक नीति पर आधारित है।”

READ ALSO  इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार करना अनुच्छेद 23 का उल्लंघन, बंधुआ मजदूरी के समान: केरल हाईकोर्ट ने PSU को कंपनी सेक्रेटरी को मुक्त करने का निर्देश दिया

“नए वाद-हेतुक” के तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2021 का फैसला केवल बैंक नीलामी की वैधता से संबंधित था और इसका अपीलकर्ता एवं प्रतिवादी के आपसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं था।

फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाईकोर्ट ने आवेदन स्वीकार करने में गलती की है। कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए बिना अनुमति के नई कार्यवाही शुरू करने पर रोक लगाने वाले सिद्धांत धारा 11 के आवेदनों पर लागू होते हैं।

कोर्ट ने घोषित किया, “उपरोक्त कारणों से, हम मानते हैं कि प्रतिवादी द्वारा दायर किया गया बाद का आवेदन विचारणीय नहीं था।” परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया गया और अपील स्वीकार कर ली गई।

केस विवरण:

  • केस शीर्षक: राजीव गद बनाम सुबोध प्रकाश
  • केस संख्या: सिविल अपील संख्या ___ / 2026 (@ SLP (C) No. 4430 / 2025)
  • पीठ: जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे
  • तारीख: 1 अप्रैल, 2026

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles