कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुए जघन्य बलात्कार और हत्या के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को इस अपराध के पीछे की बड़ी साजिश की जांच करने के लिए दोषी संजय रॉय और किसी भी अन्य संदिग्ध से पूछताछ करने की अनुमति दे दी है।
यह आदेश गुरुवार को जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस राय चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत पीड़ित डॉक्टर के माता-पिता द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें इस मामले की और अधिक व्यापक जांच की मांग की गई है।
हालांकि पूर्व नागरिक स्वयंसेवक (Civic Volunteer) संजय रॉय को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उसे प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है, लेकिन सीबीआई अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस अपराध में कोई गहरी साजिश शामिल थी।
याचिकाकर्ताओं (पीड़ित के माता-पिता) की ओर से पेश वकील जयंत नारायण चटर्जी ने अदालत में तर्क दिया कि अपराध की प्रकृति को देखते हुए इसमें एक से अधिक व्यक्तियों के शामिल होने की प्रबल संभावना है। चटर्जी ने दावा किया, “यह सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) का मामला प्रतीत होता है,” और अदालत से आग्रह किया कि जांच एजेंसी को इस कोण से भी गहनता से जांच करनी चाहिए।
इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने जांच के शुरुआती चरणों में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी जताई। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस संबंध में फॉरेंसिक विशेषज्ञों से सलाह ली है, जिन्होंने उनके संदेह की पुष्टि की है।
सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट ने आईआईटी खड़गपुर के छात्र फैजान अहमद की मौत के मामले का उदाहरण दिया। अक्टूबर 2022 में हुई उस मौत को शुरू में आत्महत्या बताया गया था, लेकिन हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शव को दोबारा निकालने और दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए गए। फॉरेंसिक जांच में हत्या के सबूत मिलने के बाद ही उस मामले में हत्या की जांच शुरू हो सकी थी।
इसी मिसाल का हवाला देते हुए, बेंच ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह आरजी कर मामले की जांच में सभी “आधुनिक जांच पद्धतियों” (Modern Investigation Methods) का उपयोग करे ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
अदालत के इस निर्देश के बाद अब सीबीआई के पास कानूनी रास्ता साफ है कि वह संजय रॉय की दोषसिद्धि से आगे बढ़कर अन्य सहयोगियों या साजिशकर्ताओं की पहचान कर सके। केंद्रीय एजेंसी से अगली सुनवाई पर अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करने की अपेक्षा की जा रही है।
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय की है।

