पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को पंजाब राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह विपक्षी नामांकन रोकने की साजिश से जुड़ी कथित ऑडियो क्लिप को किसी स्वतंत्र और राज्य सरकार के नियंत्रण से बाहर की एजेंसी को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे। यह ऑडियो दिसंबर 2023 के पंचायत चुनावों से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक कथित ऑडियो क्लिप—जिसमें पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वरुण शर्मा और अन्य अधिकारियों के बीच विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने की बातचीत बताई गई है—की स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक जांच के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश शील नागु और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने यह निर्देश शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। दोनों नेताओं ने दिसंबर 2023 में हुए ज़िला परिषद और पंचायत समिति चुनावों से पहले इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
यह ऑडियो क्लिप शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पिछले वर्ष दिसंबर में सोशल मीडिया पर साझा की थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि पटियाला के एसएसपी वरुण शर्मा और अन्य पुलिस अधिकारी आम आदमी पार्टी (AAP) के कहने पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने की साजिश रच रहे थे।
सुनवाई के बाद अकाली नेता चीमा की ओर से पेश हुए वकील परंबीर सिंह ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि क्लिप को किसी स्वतंत्र एजेंसी या चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) को जांच हेतु भेजा जाए, जो पंजाब सरकार के अधीन न हो।
बाजवा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एपीएस देओल ने बताया कि अदालत ने यह भी नोट किया कि पूर्व में दिए गए निर्देश को राज्य चुनाव आयोग ने नजरअंदाज कर दिया था।
गौरतलब है कि पंजाब पुलिस ने पहले इस क्लिप को फर्जी या एआई जनरेटेड बताया था। हालांकि, पिछले माह हुई सुनवाई में कोर्ट ने जांच में देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग की खिंचाई की थी।
शिरोमणि अकाली दल ने हाईकोर्ट के निर्देशों का स्वागत किया है और कहा है कि पार्टी इस मामले को अंजाम तक पहुंचाएगी ताकि दोषी अधिकारियों को सज़ा मिल सके। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “यह सच्चाई की जीत है।”
विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जिससे उनके उम्मीदवार नामांकन दाखिल न कर सकें। अब कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग पर यह जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच सुनिश्चित करे।

