पंजाब-हरियाणा जल विवाद: हाईकोर्ट ने केंद्र, हरियाणा और बीबीएमबी से पंजाब की पुनर्विचार याचिका पर जवाब मांगा

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र, हरियाणा और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को निर्देश दिया कि वे पंजाब सरकार की उस याचिका पर जवाब दाखिल करें, जिसमें 6 मई के आदेश की समीक्षा की मांग की गई है। इस आदेश में हरियाणा को 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने का निर्देश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई के लिए निर्धारित की।

राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, पंजाब ने केंद्र सरकार के 2 मई के हस्तक्षेप पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और कहा कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को BBMB नियमों के तहत जल आवंटन का अधिकार नहीं है। पंजाब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह, महाधिवक्ता मनिंदरजीत सिंह बेदी और अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने दलील दी कि BBMB ने हरियाणा के पक्ष में अवैध आदेश लागू करने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया।

हाईकोर्ट ने 6 मई को पंजाब को केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए निर्णय का पालन करने का निर्देश दिया था, जिसमें भाखड़ा डैम से हरियाणा के लिए आठ दिनों तक 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की सिफारिश की गई थी।

पंजाब ने इस आदेश का विरोध करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 262 और अंतर-राज्य जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत निर्धारित हिस्से से अधिक जल आवंटन केवल पंजाब की सहमति से और जल न्यायाधिकरण के माध्यम से ही हो सकता है।

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पंजाब सरकार ने बताया कि वह पहले ही हरियाणा को प्रतिदिन 4,000 क्यूसेक पानी देने के लिए सहमत हो चुकी है, लेकिन अतिरिक्त मांग का उसने कड़ा विरोध किया है। राज्य ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि 28 अप्रैल को BBMB की एक विशेष बैठक में हरियाणा की कुल 8,500 क्यूसेक पानी की मांग का उसने औपचारिक रूप से विरोध किया था और किसी प्रकार की सहमति नहीं बनी थी।

पंजाब ने 12 मई को दायर पुनर्विचार याचिका में आरोप लगाया कि निर्णय प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है और BBMB ने केंद्र सरकार (BJP-नीत केंद्र) के दबाव में पंजाब का पानी हरियाणा की ओर “अवैध रूप से मोड़ने” का काम किया है।

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याचिका में यह भी कहा गया कि 2 मई की बैठक को आधिकारिक निर्णय मंच के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जबकि राज्य के साथ कोई औपचारिक कार्यवाही या मीटिंग मिनट साझा नहीं किए गए। केवल एक प्रेस नोट जारी किया गया, जिसे आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं माना जा सकता।

पंजाब ने आरोप लगाया कि BBMB ने विधिक प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजी स्वीकृति के बिना ही अतिरिक्त पानी छोड़ दिया।

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हाईकोर्ट ने अब सभी संबंधित पक्षों को 20 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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