पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को एक कड़ा निर्देश देते हुए राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) की सभी किस्तों को 30 जून तक जारी करने को कहा है। अदालत ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुनाया, जिनमें न्यायिक और अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की तुलना में आम कर्मचारियों के साथ वित्तीय लाभों के वितरण में “भेदभावपूर्ण व्यवहार” का आरोप लगाया गया था।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने राज्य सरकार के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें खराब वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए भुगतान में देरी की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश का पालन सुनिश्चित करने और इसकी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 2 जुलाई को होगी।
यह कानूनी लड़ाई पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के कर्मचारियों सहित राज्य के अन्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों द्वारा शुरू की गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि 1 जुलाई 2023 से देय महंगाई भत्ते की किस्तें अभी तक नहीं मिली हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐतिहासिक रूप से, पंजाब सरकार हमेशा केंद्र सरकार की तर्ज पर ही महंगाई भत्ता देती रही है। यह नीति पहले वेतन आयोग की सिफारिशों से चली आ रही है और 5वें व 6वें पंजाब वेतन आयोग ने भी इसकी पुष्टि की थी। राज्य के मंत्रिपरिषद ने 17 जून 2021 को आधिकारिक तौर पर इस नीति को मंजूरी दी थी।
याचिकाओं में मुख्य मुद्दा राज्य के भीतर अलग-अलग श्रेणियों के अधिकारियों के साथ किए जा रहे “असमान व्यवहार” का था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि जहां उन्हें भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं पंजाब में कार्यरत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों को केंद्र सरकार के पैटर्न पर नियमित रूप से डीए मिल रहा है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर साल में दो बार (1 जनवरी और 1 जुलाई) डीए में संशोधन करती है। हालांकि याचिकाकर्ताओं को पांच किस्तें मिलीं, लेकिन 1 जनवरी 2023 से देय पांचवीं किस्त उन्हें नवंबर 2024 में जाकर मिली।
पीएसपीसीएल कर्मचारियों का पक्ष रख रहे वकील रशपिंदर सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश राज्य सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है कि वह अपने बकाये का निपटान जल्द करे। आर्थिक तंगी के बहाने को नामंजूर करते हुए कोर्ट ने साफ किया कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के नीतिगत और वैधानिक अधिकारों को अनिश्चित काल के लिए नहीं रोका जा सकता।
अब 2 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में यह समीक्षा की जाएगी कि पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों का कितना पालन किया है और बकाया राशि के भुगतान की वर्तमान स्थिति क्या है।

