देश के विभिन्न हाईकोर्ट में जजों की कमी को दूर करने और न्यायिक कामकाज में तेजी लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सोमवार को एक अहम कदम उठाया। राष्ट्रपति ने पटना, इलाहाबाद और उत्तराखंड हाईकोर्ट में चार अधिवक्ताओं (Advocates) की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इसमें तीन वकीलों को स्थायी जज और एक वकील को अपर जज (Additional Judge) के रूप में नियुक्त किया गया है।
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इन नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह नियुक्तियां भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के साथ परामर्श के बाद की गई हैं।
किन वकीलों को मिली जिम्मेदारी?
कानून मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, निम्नलिखित अधिवक्ताओं को हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया है:
- पटना हाईकोर्ट: अधिवक्ता रितेश कुमार और प्रवीण कुमार को पटना हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्त किया गया है।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट: अधिवक्ता जय कृष्ण उपाध्याय को इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज बनाया गया है।
- उत्तराखंड हाईकोर्ट: अधिवक्ता सिद्धार्थ साह को उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपर जज (Additional Judge) के तौर पर नियुक्त किया गया है।
कॉलेजियम की सिफारिश और संवैधानिक प्रक्रिया
इन नियुक्तियों की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिशें महत्वपूर्ण रही हैं। गौरतलब है कि 1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लिए जय कृष्ण उपाध्याय के नाम की सिफारिश की थी। उस समय कॉलेजियम ने विभिन्न हाईकोर्ट के लिए कुल 12 अधिवक्ताओं के नामों को मंजूरी दी थी।
संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति और अनुच्छेद 224 के तहत अपर जजों की नियुक्ति का प्रावधान है। यह प्रक्रिया राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्यों के राज्यपालों के बीच परामर्श पर आधारित होती है। इन नई नियुक्तियों से उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटान में तेजी आएगी और न्यायपालिका को मजबूती मिलेगी।

