हाईकोर्ट परिसर और अधिवक्ता के चैंबर में बिना अनुमति प्रवेश के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, निलंबन भी हुआ

लखनऊ: न्यायपालिका और पुलिस बल के बीच बढ़ते तनाव के एक महत्वपूर्ण मामले में, लखनऊ हाईकोर्ट प्रशासन ने हाईकोर्ट परिसर और एक वरिष्ठ अधिवक्ता के चैंबर में अनधिकृत और कथित तौर पर धोखे से प्रवेश करने के आरोप में कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई है।

यह प्राथमिकी (संख्या 0035/2026) 19 जनवरी, 2026 की रात को विभूति खंड पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई।

घटना का विवरण: धोखे से प्रवेश

हाईकोर्ट के सुरक्षा प्रशासन द्वारा दायर शिकायत के अनुसार, यह घटना सोमवार शाम की है। लगभग 5:50 बजे, पुलिस अधिकारियों का एक समूह—जिसमें उप-निरीक्षक उस्मान खान, उप-निरीक्षक लखन सिंह और कांस्टेबल पुष्पेंद्र सिंह शामिल थे—हाईकोर्ट परिसर में दाखिल हुआ।

आरोप है कि इन अधिकारियों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए यह दावा किया कि वे जवाबी हलफनामा (जवाब-दावा) दाखिल करने के लिए महाधिवक्ता/सीएससी (CSC) कार्यालय जा रहे हैं। हालांकि, आंतरिक जांच और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से एक गंभीर घटनाक्रम सामने आया:

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अनधिकृत तलाशी: सीएससी कार्यालय जाने के बजाय, अधिकारियों को अधिवक्ता गुफरान सिद्दीकी के चैंबर नंबर सी-515 के पास देखा गया।

पकड़ने का प्रयास: चश्मदीदों, जिनमें अधिवक्ता सज्जाद हुसैन शामिल थे, ने बताया कि अधिकारियों ने चैंबर के भीतर अधिवक्ता सिद्दीकी और उनकी पत्नी श्रीमती अमीना खातून को “पकड़ने” या हिरासत में लेने का प्रयास किया।

झूठा बहाना: जब कोर्ट सुरक्षा और अन्य अधिवक्ताओं ने उनसे पूछताछ की, तो पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर दावा किया कि वे केस नंबर 320/2025 (काकोरी थाना) की जमानत अर्जी के सिलसिले में वहां आए थे। 19 जनवरी की कोर्ट कॉज लिस्ट के सत्यापन से पता चला कि उस दिन ऐसा कोई मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं था।

कानूनी उल्लंघन और आरोप

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हाईकोर्ट प्रशासन ने रजिस्ट्रार (सुरक्षा) शैलेंद्र कुमार के माध्यम से स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने हाईकोर्ट की सुरक्षा में सेंध लगाकर और प्रवेश पाने के लिए झूठे दस्तावेजों/कारणों का उपयोग करके एक “गंभीर अपराध” किया है।

रजिस्ट्रार (सुरक्षा) ने रिपोर्ट में उल्लेख किया कि यह प्रवेश “पूरी तरह से अनधिकृत” था और एक “गंभीर सुरक्षा उल्लंघन” की श्रेणी में आता है। शिकायत में इस बात पर जोर दिया गया है कि एक गैर-मौजूद अदालती मामले के बहाने आधिकारिक कार्य का स्वांग रचकर प्रवेश किया गया, जो अदालत के एक अधिकारी को परेशान करने या अवैध रूप से हिरासत में लेने के पूर्व-नियोजित प्रयास का संकेत देता है।

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हाईकोर्ट प्रशासन के अलावा, मौके पर मौजूद मुख्य गवाह अधिवक्ता सज्जाद हुसैन द्वारा एक अलग प्राथमिकी (संख्या 0034/2026) भी दर्ज कराई गई है। यह दूसरी रिपोर्ट कानूनी समुदाय और पुलिस कर्मियों के बीच हुई झड़प का विस्तृत विवरण प्रदान करती है।

वर्तमान स्थिति

हाईकोर्ट प्रशासन ने आरोपी अधिकारियों द्वारा उपयोग की गई प्रवेश पर्चियां और सीसीटीवी फुटेज विभूति खंड की जांच टीम को सौंप दी है। लखनऊ पुलिस ने अपने ही अधिकारियों के आचरण की औपचारिक जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने कानूनी बिरादरी में व्यापक रोष पैदा कर दिया है, जिसमें न्यायिक परिसर की पवित्रता का उल्लंघन करने के लिए शामिल कर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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