उड़ीसा हाईकोर्ट ने RTI आवेदनों की सीमा तय करने के आदेश को किया खारिज, कहा- आयोग एक साल में केवल 12 आवेदन की शर्त नहीं लगा सकता

उड़ीसा हाईकोर्ट ने उड़ीसा सूचना आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक नागरिक पर एक कैलेंडर वर्ष में 12 से अधिक सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन दायर करने पर रोक लगाई गई थी। साथ ही, आयोग ने याचिकाकर्ता को एक वर्ष के लिए कोई भी आवेदन करने से प्रतिबंधित कर दिया था। जस्टिस आर.के. पटनायक की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह का प्रतिबंध लगाना “उचित नहीं” (Not Justified) है, भले ही आवेदक को कई आवेदन दायर करने की आदत हो।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला चित्तरंजन सेठी द्वारा दायर एक रिट याचिका से संबंधित है, जिसमें उन्होंने उड़ीसा सूचना आयोग द्वारा 13 सितंबर, 2025 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने शुरू में आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी मांगने के लिए संबंधित प्राधिकरण से संपर्क किया था। जब उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने अपील दायर की।

उड़ीसा सूचना आयोग ने अपने आदेश में अपीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मांगी गई जानकारी “पुनरावृत्ति” (Repetitive) प्रकृति की है। इसके अलावा, आयोग ने याचिकाकर्ता के “आचरण” पर विचार करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से एक वर्ष की अवधि के लिए कोई भी नया आवेदन दायर करने से वंचित (Debar) कर दिया और यह शर्त लगा दी कि वे भविष्य में एक कैलेंडर वर्ष में विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों के समक्ष अधिकतम 12 आवेदन ही दायर कर सकते हैं।

पक्षों की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता श्री के.के. राउत ने तर्क दिया कि आयोग का आदेश “अस्पष्ट” (Cryptic) है। उन्होंने अदालत को बताया कि आवेदनों को दोहराव वाला बताकर निपटा दिया गया, जबकि वास्तव में मांगी गई जानकारी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं कराई गई थी। श्री राउत ने कहा कि आयोग द्वारा भविष्य में आवेदन करने पर रोक लगाना कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

दूसरी ओर, विपक्षी पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हुए अधिवक्ता श्री बी.के. डैश (सूचना आयोग के लिए) और अतिरिक्त सरकारी वकील श्री एम.के. मोहंती (राज्य के लिए) ने आयोग के निर्णय को सही ठहराया और उसका बचाव किया।

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कोर्ट का विश्लेषण और अवलोकन

पक्षों को सुनने के बाद, जस्टिस आर.के. पटनायक ने पाया कि आवेदनों को देखने से यह स्पष्ट होता है कि “याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी प्रदान नहीं की गई है।” हाईकोर्ट ने कहा कि पहले से दी गई जानकारी को छोड़कर, शेष जानकारी याचिकाकर्ता के साथ साझा की जानी चाहिए।

आरटीआई आवेदनों की संख्या पर सीमा (Cap) लगाने के मुख्य कानूनी मुद्दे पर विचार करते हुए, कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की:

“कोर्ट का यह भी मत है कि याचिकाकर्ता पर एक कैलेंडर वर्ष में आरटीआई अधिनियम के तहत कोई और आवेदन न करने और साल में केवल 12 आवेदन करने की अनुमति देने का प्रतिबंध उचित नहीं है।”

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग के पास फाइलिंग की संख्या के आधार पर ऐसा कोई व्यापक प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है। निर्णय में कहा गया:

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“दूसरे शब्दों में, कोर्ट इस निष्कर्ष पर है कि विपक्षी संख्या 1 (आयोग) याचिकाकर्ता पर ऐसा प्रतिबंध नहीं लगा सकता था, भले ही उसे आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी मांगने के लिए कई आवेदन दायर करने की आदत हो…”

निर्णय

उड़ीसा हाईकोर्ट ने रिट याचिका को स्वीकार करते हुए 13 सितंबर, 2025 के आक्षेपित आदेश को उस हद तक रद्द कर दिया, जहां तक उसमें प्रतिबंध लगाए गए थे। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को “शेष जानकारी की आपूर्ति” की जाए।

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केस डीटेल्स:

  • केस टाइटल: चित्तरंजन सेठी बनाम उड़ीसा सूचना आयोग, भुवनेश्वर व अन्य
  • केस नंबर: W.P.(C) No.29216 of 2025
  • कोरम: जस्टिस आर.के. पटनायक
  • याचिकाकर्ता के वकील: श्री के.के. राउत
  • विपक्षी पक्षों के वकील: श्री एम.के. मोहंती (ASC), श्री बी.के. डैश

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