लश्कर-ए-तैयबा भर्ती मामले में NIA कोर्ट ने आरोपी को 10 साल की सश्रम कैद सुनाई, बंगाल में युवाओं को जिहाद के लिए उकसाने की साजिश का मामला

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम युवाओं को पाकिस्तान समर्थित साजिश के तहत प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने के मामले में NIA की विशेष अदालत ने कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले सय्यद एम इदरीस को 10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

विशेष NIA कोर्ट, कोलकाता ने बुधवार को सजा सुनाते हुए इदरीस पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने उस पर ₹70,000 का जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा द्वारा पश्चिम बंगाल में युवाओं को भड़काकर जिहाद के लिए कट्टरपंथी बनाने की एक साजिश से जुड़ा है। मार्च 2020 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने सबसे पहले इस केस में तानिया परवीन नाम की एक महिला को उत्तर 24 परगना ज़िले के बादुरिया से गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से भारत के खिलाफ ‘जिहाद’ में शामिल होने के लिए मुस्लिम युवाओं को उकसाने वाले भड़काऊ साहित्य बरामद हुए थे।

इसके बाद अप्रैल 2020 में NIA ने केस की जांच अपने हाथ में ली और इदरीस समेत एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क पाकिस्तान स्थित संचालकों के इशारे पर चल रहा था, जो भारत में सांप्रदायिक तनाव का फायदा उठाकर युवाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करना चाहते थे।

NIA अधिकारियों ने बताया कि इदरीस की सजा के बावजूद इस मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ ट्रायल अभी भी जारी है।

READ ALSO  धर्मांतरण कानून के तहत FIR सिर्फ पीड़ित या परिजन ही करा सकते हैं, बाहरी व्यक्ति नहीं: सुप्रीम कोर्ट 
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles