एनजीटी ने मिज़ोरम सरकार से ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर नई विस्तृत रिपोर्ट मांगी, 5 नवंबर तक दाखिल करने का निर्देश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मिज़ोरम सरकार को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर एक नई, व्यापक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह आदेश तब दिया गया जब ट्रिब्यूनल ने राज्य द्वारा दायर प्रारंभिक रिपोर्ट में “अनियमितताएं और कमियां” पाईं।

एनजीटी की प्रधान पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव कर रहे हैं, ने यह निर्देश 13 अक्टूबर को उस मामले की सुनवाई के दौरान दिया जो नगर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और अन्य पर्यावरणीय मुद्दों से संबंधित अनुपालन की निगरानी से जुड़ा है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि मिज़ोरम सरकार की स्थिति रिपोर्ट न तो मुख्य सचिव के हलफनामे के रूप में दायर की गई थी और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा प्रमाणित की गई थी, जिससे प्रस्तुत आंकड़ों की सटीकता पर संदेह पैदा होता है।
एनजीटी ने पाया कि राज्य ने अपशिष्ट संग्रह, प्रसंस्करण और निस्तारण की स्पष्ट रूपरेखा नहीं दी है और उसकी योजना एवं क्रियान्वयन रणनीतियों में गंभीर खामियां हैं।

READ ALSO  केंद्रीय मंत्री शेखावत के खिलाफ सच बोलने को 'मानहानि' नहीं कहा जा सकता: राजस्थान के सीएम गहलोत ने दिल्ली कोर्ट से कहा

पीठ ने कहा, “स्थिति रिपोर्ट में योजना और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर अप्रभावीता झलकती है तथा अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर को पाटने के प्रयासों में भी गंभीर कमियां हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, मिज़ोरम में प्रतिदिन लगभग 398.15 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें से 330.5 टन प्रतिदिन ही संसाधित किया जाता है, जबकि 67.65 टन प्रतिदिन अपशिष्ट अप्रसंस्कृत रह जाता है, जो राज्य के legacy waste में इज़ाफा करता है।

एनजीटी ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में 28 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण और पृथक्करण की स्थिति का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। इसके अलावा कम्पोस्टिंग प्लांट्स और Refuse Derived Fuel (RDF) यूनिट्स की स्थिति तथा अपशिष्ट प्रसंस्करण में अंतर को दूर करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य भी निर्दिष्ट नहीं किए गए हैं।

एनजीटी ने यह भी पाया कि मिज़ोरम में 51.81 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) तरल अपशिष्ट उत्पन्न होता है — जिसमें से 31.37 MLD शहरी क्षेत्रों और 20.44 MLD ग्रामीण क्षेत्रों से आता है — लेकिन राज्य की कुल उपचार क्षमता केवल 10 MLD (आइज़ॉल) है, जिससे 21.37 MLD का अंतर रह जाता है।

राज्य के 11 जिलों में से 10 जिलों की सीवेज प्रबंधन योजनाएं अभी तक अंतिम रूप नहीं ली गई हैं, और प्रस्तावित 27 MLD सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता के लिए भी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।

ट्रिब्यूनल ने मिज़ोरम सरकार को निर्देश दिया कि वह 5 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले तक नई एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) हलफनामे के रूप में ई-फाइल करे।

READ ALSO  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों के लिए ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल लॉन्च किया

इस रिपोर्ट में ठोस और तरल अपशिष्ट की उत्पत्ति, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, अवशिष्ट अपशिष्ट, अंतर विश्लेषण, निधि आवंटन और समयसीमाएं स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए।

एनजीटी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को प्रत्येक स्थानीय निकाय को अलग-अलग फंड आवंटित करने होंगे और क्रियान्वयन एजेंसियों को कार्ययोजना अंतिम रूप देनी होगी, जिसकी जानकारी अगली रिपोर्ट में दी जानी चाहिए।

पीठ ने आगे निर्देश दिया कि राज्य सरकार सीवेज प्रबंधन पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी प्रस्तुत करे, जिसमें उत्पत्ति, संग्रहण, उपचार, अंतर विश्लेषण, समयसीमा और उपचारित जल के उपयोग से संबंधित विवरण शामिल हों।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles