दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले में आरोपी और जमानत पर रिहा एक्टिविस्ट नताशा नरवाल की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। नरवाल ने एक अकादमिक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए ब्रिटेन जाने की अनुमति नहीं देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
जस्टिस अमित बंसल ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की है।
नरवाल ने 2 नवंबर से 1 दिसंबर के बीच ब्रिटेन जाने की अनुमति मांगी है। उनके वकील ने हाईकोर्ट से याचिका पर जल्द फैसला करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के लिए नरवाल को पहले अपना पासपोर्ट वापस लेना होगा, जिसके बाद वह वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगी और हवाई टिकट की व्यवस्था कर पाएंगी।
अदालत को बताया गया कि आपराधिक कार्यवाही के कारण नरवाल ने अपना पासपोर्ट पहले ही जमा कर दिया था।
ट्रायल कोर्ट ने 6 अक्टूबर को खारिज की थी अर्जी
इससे पहले 6 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट ने नरवाल को ब्रिटेन जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने उनके खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता और मामले की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विदेश यात्रा की इजाजत नहीं दी थी।
नरवाल ने अब गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज मामले में ट्रायल कोर्ट के इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
दिल्ली दंगों से जुड़े तीन मामलों में आरोपी हैं नरवाल
दिल्ली पुलिस ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े तीन एफआईआर में नताशा नरवाल को आरोपी बनाया था। इनमें UAPA के तहत दर्ज दंगों की बड़ी साजिश का मामला भी शामिल है।
24 फरवरी 2020 को नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई झड़पों ने हिंसक रूप ले लिया था। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के इन दंगों में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 700 लोग घायल हुए थे।
दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल, शरजील इमाम, खालिद सैफी, उमर खालिद और कई अन्य लोगों पर हिंसा की साजिश रचने का आरोप लगाया है। यह हिंसा उस समय हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य विदेशी गणमान्य व्यक्ति दिल्ली में मौजूद थे।
जून 2021 में हाईकोर्ट ने दी थी जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने जून 2021 में नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को UAPA मामले में जमानत दी थी।
जमानत देते समय हाईकोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार और आतंकवादी गतिविधियों के बीच अंतर को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी।
अदालत ने कहा था कि असहमति की आवाज दबाने की कोशिश में सरकार ने विरोध प्रदर्शन के अधिकार और आतंकवादी गतिविधियों के बीच की सीमा को धुंधला कर दिया है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि ऐसी सोच को बढ़ावा मिलता है तो यह लोकतंत्र के लिए दुखद दिन होगा।
अब हाईकोर्ट 15 अक्टूबर को नरवाल की विदेश यात्रा पर लगी रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। इस बीच दिल्ली पुलिस को अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

