विविध ख़बरें: 17 मार्च

मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में आये आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल नही उठाया जा सकता:– सुप्रीम कोर्ट।

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि मेरिट के तहत सामान्य श्रेणी में जगह बनाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल नही उठाया जा सकता। 

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश में साल 2019 में 3,295 पीएसी कॉन्स्टेबल व फायरमैन की भर्ती को जायज बताते हुए यह बात कही। 

जस्टिस यूयू ललित एंव जस्टिस रविन्द्र भट और जस्टिस हृषिकेश राय की पीठ ने कहा कि सामान्य वर्ग के छात्र यह दावा बिल्कुल नही कर सकते कि उनकी जगह मारी गई या अनारक्षित सीटों पर केवल उनका अधिकार है। 

पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के अनरूप भर्ती की गई है। किसी अभ्यर्थी का चयन पूर्व में भले ही आरक्षित पद पर हुआ हो,लेकिन वह मेरिट के उद्धार

नए उपभोक्ता कानूनों का पुराने मामला पर असर नही पड़ेगा:–सुप्रीम कोर्ट।

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,2019 के प्रभाव में आने से पहले दाखिल उपभोक्ता शिकायतों का निपटारा 1986 के अधिनियम के तहत तय किए गए क्षेत्राधिकार वाले फोरम में ही होगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से देश भर में उपभोक्ता फोरम के क्षेत्राधिकार को लेकर भ्रम की स्थिति दूर हो गई है। 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ एंव जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के उस निर्देश को दरकिनार कर दिया है। जिसमे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दर्ज शिकायतों को 2019 के अधिनियम में तय किए गए क्षेत्राधिकार वाले फोरम में ट्रांसफर करने की बात कही गई थी। एनसीडीआरसी ने आदेश में कहा,नया कानून 2020 में अस्तित्व में आया था। और नए कानून के तहत जो क्षेत्राधिकार है उसी के तहत मामले की सुनवाई होगी। और पुराने कानून के तहत दाखिल शिकायतों के ट्रांसफर का आदेश दिया था। 

संसद ने विशेष मामलों में 24 सप्ताह तक गर्भपात को मंजूरी दी।

नई दिल्ली—- संसद ने विशेष मामलों में 24 सप्ताह तक के गर्भपात को मंजूरी दे दी है। इस बाबत सरकार द्वारा पेश मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी संशोधन विधेयक 2020 राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ। लोकसभा में यह एक वर्ष पूर्व पास हो चुका है।

विधेयक के कानून बनने पर विशेष मामलों में 20 हफ्ते के जगह 24 हफ़्तों तक गर्भपात की अनुमति होगी,पर इसके लिए महिला की रजामंदी अनिवार्य होगी। कानून में दुष्कर्म पीड़िता,यौन उत्पीड़न, नाबलिग और दिव्यांगों को शामिल किया गया है। चर्चा के दौरान विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग उठी थी, लेकिन इसे ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इसके पश्चात बिल पास करने के लिए वोटिंग हुई और उपसभापति हरिवंश ने विधेयक के पारित होने की घोषणा की।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि दुनिया भर में अपनाई जा रही तकनीक पर अध्यन और देश के विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही बिल में संशोधन किए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसा कोई कानून पारित नही होगा जो महिलाओं के लिए नुकसानदेह हो। 

पोस्को एक्ट के तहत नाबालिग की आयु 16 वर्ष करने की सिफारिश।

नई दिल्ली—- संसदीय समिति ने केंद्र सरकार से पोस्को एक्ट के तहत किशोर की आयु 18 से कम कर 16 साल करने की सिफारिश की है।

संसदीय समिति ने कहा है कि बिना कार्यवाई के छोड़े जाने पर किशोर यौन अपराधी ज्यादा गंभीर और जघन्य अपराध कर सकते हैं। 

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मामलों की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्यसभा में सौंप दी। इसमें उल्लेख है कि पोस्को एक्ट में बड़ी तादाद में ऐसे मामले आए हैं। जिनमे अपराधी की आयु कम थी। लिहाजा बेहद जरूरी है कि इन प्रावधानों पर फिर से विचार किया जाय क्योंकि गंभीर अपराधों में नाबालिग ज्यादा पकड़े जा रहे हैं। 

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