मद्रास हाईकोर्ट ने पट्टाली मक्कल काची (PMK) के भीतर चल रहे आंतरिक नेतृत्व विवाद की सुनवाई को तमिलनाडु में आगामी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक टालने का निर्देश दिया है। मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस टी.वी. तमिलसेल्वी ने आदेश दिया कि सिटी सिविल कोर्ट इस मामले की कार्यवाही 10 मई के बाद ही शुरू करे।
यह कानूनी लड़ाई पीएमके संस्थापक एस. रामदोस और उनके बेटे अंबुमणि रामदोस के बीच वर्चस्व को लेकर है। सीनियर रामदोस ने निचली अदालत का रुख कर अंबुमणि को पार्टी के नाम, झंडे या आधिकारिक प्रतीक का उपयोग करने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा (Injunction) की मांग की थी। इसके जवाब में अंबुमणि ने भी एक काउंटर-सूट दायर किया, जिससे पार्टी के भीतर का यह सत्ता संघर्ष और गहरा गया।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, जस्टिस टी.वी. तमिलसेल्वी ने निचली अदालत की कार्यवाही पर लगी अंतरिम रोक को हटाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि चूंकि राज्य एक महत्वपूर्ण चुनावी चरण में प्रवेश कर रहा है, इसलिए चुनाव का शोर थमने के बाद ही इस नेतृत्व विवाद पर विचार करना उचित होगा।
तमिलनाडु में फिलहाल विधानसभा की 234 सीटों के लिए चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां 23 अप्रैल को मतदान होना है। 4 मई को होने वाली मतगणना को देखते हुए, हाईकोर्ट ने यह तय किया कि सिविल कोर्ट इस मामले को 10 मई को पूरी चुनावी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही हाथ में ले।
इस कानूनी विवाद का दायरा तब और बढ़ गया जब पीएमके महासचिव वदिवेल रावणन ने एक पक्षकार बनने के लिए याचिका (Impleading Petition) दायर की। रावणन ने मामले में खुद को एक पक्ष बनाने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्वीकार कर लिया।
निचली अदालत की कार्यवाही में यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखकर, हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि पार्टी के आंतरिक कानूनी टकराव का असर राज्य के चुनावों की तात्कालिक गहमागहमी पर न पड़े।

