क़र्ज़ (Loan Moratorium) माफ़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा…

सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कोरोना संकट के इस दौर में वित्तीय संकट से जूझ रहे लोगों को कर्ज चुकाने से राहत देने का निर्णय केंद्र के नीतिगत फैसले पर निर्भर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि वह ब्याजमुक्त कर्ज की राहत देने की स्थिति में नही है।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने लॉकडाउन और महामारी की दूसरी लहर के दौरान कर्जदारों को राहत देने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी के लिए केंद्र सरकार को प्रतिनिधित्व देने के लिए कहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के संपर्क साधने के दौरान पीठ ने कहा,हम याचिकाकर्ता के लिए केंद्र को अपना प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दे सकते हैं। 

कई प्रयासों के बाबजूद याचिकाकर्ता से संपर्क न कर पाने के बाद पीठ ने कहा कि वह याचिका पर 11 जून को विचार करेगी। इस जनहित याचिका में केंद्र को सभी ऋण के लिए छह माह की अवधि या कोविड 19 की स्थिति जारी रहने तक मोरेटोरियम देने के निर्देश देने की गुहार की गई है। 

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याचिका में कहा है कि बैंक या वित्तीय संस्थान छः महीने की अवधि के लिए किसी भी नागरिक या व्यक्ति या किसी कॉरपोरेट निकाय की संपत्ति की नीलामी को लेकर कोई कार्यवाई न करें। 

याचिका में यह भी गुहार लगाई गई है कि कोविड 19 महामारी में दूसरी लहर को देखते हुए छः माह की अवधि के लिए किसी भी खाते को गैर निष्पादित संपति (एनपीए) घोषित नही किया जाना चाहिए। 

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