केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को रेलवे बोर्ड की उस देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिसमें कई महीनों का समय मिलने के बावजूद उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि तत्कल टिकट बुकिंग के लिए आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य है या नहीं। अदालत एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसके तहत तत्कल टिकट बुकिंग के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण लागू किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति स्याम कुमार वी एम की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान रेलवे बोर्ड की ओर से पेश वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा।
इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए पहले ही कई महीनों का समय दिया जा चुका है, फिर भी रेलवे बोर्ड ने अब तक अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है।
पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “इतने साधारण मुद्दे पर आप इतना समय ले रहे हैं। कई महीनों का समय दिए जाने के बाद भी आपने जवाब दाखिल नहीं किया है। यदि आप जवाब देने में असमर्थ हैं, तो हम स्वयं इस मुद्दे का निर्णय कर सकते हैं।”
यह मामला उस जनहित याचिका से जुड़ा है जिसमें केंद्र सरकार के उस परिपत्र को चुनौती दी गई है, जिसमें तत्कल टिकट बुकिंग के लिए आधार आधारित प्रमाणीकरण को अनिवार्य करने की बात कही गई है।
हालांकि अदालत ने रेलवे बोर्ड को अंतिम अवसर देते हुए तीन सप्ताह का समय और दिया, साथ ही स्पष्ट किया कि इस अवधि के भीतर उसका जवाब दाखिल किया जाना आवश्यक है।
इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए स्थगित कर दी।

