केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को मलयालम फिल्म अभिनेत्री श्वेता मेनन के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें उन पर अपनी कुछ फिल्मों और एक विज्ञापन के जरिए कथित रूप से अश्लील सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगाया गया था। न्यायमूर्ति सी. एस. डायस ने मेनन की याचिका स्वीकार करते हुए एफआईआर को निरस्त कर दिया। अदालत का विस्तृत आदेश अभी जारी होना बाकी है।
श्वेता मेनन के खिलाफ यह मामला सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना) और अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया था।
यह शिकायत मार्टिन मेनाचेरी नामक व्यक्ति ने दायर की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अभिनेत्री ने कई वर्ष पहले एक कंडोम विज्ञापन में काम किया था और फिल्मों ‘पालेरि माणिक्क्यम’, ‘रथिनिर्वेदम’ और ‘कलीमन्नु’ में कथित तौर पर अश्लील और अभद्र तरीके से अभिनय किया था।
इस मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अगस्त 2025 में ही एफआईआर से संबंधित आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। उस समय अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की इस दलील में दम है कि शिकायत को जांच के लिए भेजने से पहले आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। अदालत ने संकेत दिया था कि शिकायत पर आगे बढ़ने से पहले पुलिस से रिपोर्ट मंगाना और प्रारंभिक जांच करना जरूरी था।
अपनी याचिका में श्वेता मेनन ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा था कि उनके खिलाफ लगाए गए अपराध के तत्व ही बनते नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह शिकायत उस समय दर्ज कराई गई जब उन्होंने एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया था।
बाद में श्वेता मेनन AMMA की अध्यक्ष निर्वाचित भी हुईं।
अभिनेत्री ने अदालत को यह भी बताया कि जिन फिल्मों का शिकायत में उल्लेख किया गया है, वे सभी विधिवत सेंसर बोर्ड से प्रमाणित हैं और वर्षों से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि फिल्म ‘पालेरि माणिक्क्यम’ में निभाए गए उनके किरदार के लिए उन्हें केरल राज्य का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार भी मिला था।
कंडोम विज्ञापन के संबंध में भी उनका कहना था कि उसे भी विधिवत प्रमाणन मिला था और वह कानूनी रूप से प्रसारित किया गया था।
याचिका में यह भी कहा गया कि उन्हें पोर्न वेबसाइट चलाने से जोड़ने का आरोप पूरी तरह निराधार और मानहानिकारक है।
हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द किए जाने के बाद इस मामले में शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है। अदालत का विस्तृत आदेश जारी होने का इंतजार है।

