कर्नाटक हाईकोर्ट ने श्रृंगेरी विधानसभा क्षेत्र में 2023 के चुनाव के दौरान डाले गए और बाद में खारिज कर दिए गए 279 पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्रों) की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत का यह फैसला इस निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी नतीजों पर बड़ा असर डाल सकता है।
जस्टिस आर नटराज ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पराजित उम्मीदवार डी.एन. जीवराज द्वारा दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। जीवराज ने कांग्रेस के मौजूदा विधायक टी.डी. राजेगौड़ा के निर्वाचन को चुनौती दी थी, जिन्होंने पिछले चुनाव में मात्र 201 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
अपनी याचिका में जीवराज ने राजेगौड़ा की जीत की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लगभग 300 पोस्टल बैलेट को गलत तरीके से खारिज किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि इन मतों की गिनती सही ढंग से की जाती, तो परिणाम अलग हो सकते थे, विशेषकर तब जब जीत का अंतर खारिज किए गए मतों की संख्या से कम है। चुनाव आयोग के नियमों के तहत, यदि जीत का अंतर खारिज किए गए पोस्टल बैलेट से कम होता है, तो उनकी पुन: जांच और गिनती की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है।
हाईकोर्ट ने अब चुनाव रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को निर्देश दिया है कि वह इन 279 खारिज किए गए मतपत्रों का गहनता से पुन: सत्यापन करें।
जस्टिस नटराज के आदेश के अनुसार, आगे की कार्रवाई पूरी तरह से इस पुन: सत्यापन के नतीजों पर निर्भर करेगी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि मतपत्र गलत तरीके से खारिज किए गए थे या नए आंकड़ों से चुनावी समीकरण बदलते हैं, तो रिटर्निंग ऑफिसर को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
- पोस्टल बैलेट की औपचारिक रूप से दोबारा गिनती करना।
- अपडेट की गई गिनती के आधार पर नए परिणामों की घोषणा करना।
आदेश जारी होने के तुरंत बाद, टी.डी. राजेगौड़ा के वकील ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय मांगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, हाईकोर्ट ने पुन: सत्यापन के आदेश के क्रियान्वयन पर दो सप्ताह की रोक (Stay) लगा दी है।
इस घटनाक्रम के बाद श्रृंगेरी सीट का राजनीतिक भविष्य अब देश की शीर्ष अदालत के रुख पर टिका हुआ है।

