कानपुर देहात कोर्ट का अजीबोगरीब फैसला, अभियुक्त को हॉस्पिटल साफ करने की सजा

उत्तरप्रदेश—- यूं तो कानून की किताब में अलग अलग अपराधों के लिये भिन्न भिन्न सजाओं का प्रवधान है लेकिन कानपुर देहात की कोर्ट ने एक आरोपी को ऐसी सजा दी है जिससे लोगों में कानून के प्रति असमंजस का भाव दिख रहा है। 

कानपुर देहात की कोर्ट ने 25 वर्ष पुराने अपराध में अभियुक्त को दो माह तक अस्पताल परिसर में झाड़ू लगाने और साफ सफाई करने की सजा सुनाई है। अभियुक्त भी इसको प्रेरणादायक मानकर पूर्ण कर रहा ,और इसे समाजसेवा के नजरिए से देख रहा है। हालांकि उसने अपराध न करने का दावा करते हुए पूर्व की कोर्ट के निर्णय पर अपील की थी। जिस पर यह सजा सुनाई गई। लेकिन अब उसने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने का मन छोड़ कर सजा ईमानदारी से पूरी करने को बात कही है। और वह नियमित रूप से वक्त पर पहुँचकर स्वास्थ्य केंद्र में साफ सफाई कर रहे हैं। 

आज से लगभग 25 वर्ष पूर्व जालौन के इकौना गांव निवासी बालमुकुंद के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज हुआ था। साल 1996 में कानपुर देहात के नगवां गांव में वह रिश्तेदार के घर गया हुआ था। वहां पर रहने वाले फूल सिंह ने उस पर मारपीट का मुकदमा दर्ज करवाया था। पुलिस ने जांच पड़ताल करने के बाद उसके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। भोगनीपुर स्थित मुंसिफ कोर्ट ने मुकदमे की सुनवाई करते हुए फूलसिंह की गवाही और साक्ष्यों के मद्देनजर बाल मुकुंद को और उसके रिश्तेदारों को चार चार वर्ष की सजा सुनाई थी।

बालमुकुंद ने खुद पर लगे आरोपों को गलत ठहराते हुए मुंसिफ कोर्ट के फैसले को जिला सत्र न्यायालय में  चुनौती दी थी। अपर सत्र न्यायालय में 5 वर्षों तक मामले की सुनवाई चली। पिछले दिनों कानपुर देहात सत्र न्यायालय ने पूर्व का फैसला रदद करते हुए बालमुकुंद को अपराध का दोषी मानते हुए घर के समीप स्वास्थ्य केंद्र में दो महीने तक सफाई करने की सजा सुनाई। इस फैसले पर बालमुकुंद ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। 

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