जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली के शपथ ग्रहण के साथ ही आज भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों के सभी 34 पद भर गए हैं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित एक समारोह में दोनों नए जजों को पद की शपथ दिलाई। इस पूरे कार्यक्रम का सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर सीधा प्रसारण भी किया गया।
इन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 25 अगस्त को हुई अपनी बैठक में की थी, जिसे केंद्र सरकार ने 27 अगस्त को मंजूरी दे दी थी। इन दोनों जजों के शपथ लेने के साथ ही शीर्ष अदालत में जजों की कोई रिक्ति नहीं बची है।
जस्टिस आलोक अराधे इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। 13 अप्रैल, 1964 को रायपुर में जन्मे जस्टिस अराधे तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं और उन्होंने कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जज के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।

वहीं, 28 मई, 1968 को जन्मे जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। उनकी नियुक्ति को लेकर कुछ चर्चा भी हुई, क्योंकि पांच-सदस्यीय कॉलेजियम की सदस्य जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने उनकी पदोन्नति पर असहमति जताई थी। खबरों के अनुसार, जस्टिस नागरत्ना की असहमति का आधार जस्टिस पंचोली की वरिष्ठता क्रम और जुलाई 2023 में गुजरात हाईकोर्ट से पटना हाईकोर्ट में उनके तबादले की परिस्थितियां थीं। हालांकि, इस असहमति के बावजूद कॉलेजियम ने 4:1 के बहुमत से उनके नाम की सिफारिश की थी। जस्टिस पंचोली अक्टूबर 2031 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बन सकते हैं।