क्यूँ जज ने एक किशोर को रिहा करने के बाद उसकी पढ़ायी का पूरा खर्च उठाने की ज़िम्मेदारी ली

किशोर न्याय परिषद के प्रधान दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र अपने फैसलों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। इनके कई महत्वपूर्ण निर्णय आज भी चर्चा का विषय बने हुए है।

इसी कड़ी में एक बार फिर से नाबालिग किशोर का हुनर देखकर जज साहब ने न सिर्फ उसे रिहा किया बल्कि उसकी इंटर की पढ़ाई का पूरा खर्च का जिम्मा भी लिया।

मैट्रिक एग्जाम में 77 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले किशोर को रिहा कर दिया, जो मारपीट के मामले में बालक आरोपी करार दिया गया था।

जज मानवेंद्र सिंह ने जिला बाल संरक्षण इकाई को पश्चातवर्ती देखभाल योजना का लाभ दिलाने और परिवारिकजनो को सरकारी सहायता पहुचाने के लिए संबंधित बीडीओ को आदेश दिया है।

आरोपित किशोर महादलित फैमिली से ताल्लुक रखता है। किशोर के घरवालों की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। किशोर की सात बहने और दो भाई है। किशोर के पिता विक्षिप्त है और माँ अक्सर बीमारी से ग्रस्त रहती है।

ऐसे में प्रतिभाशाली छात्र ने कोर्ट में आवेदन देकर आगे की पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जाहिर की थी। इसी को देखते हुए न्यायमूर्ति ने दीपनगर थाने से इसके परिवार से जुड़ी हुई सारी रिपोर्ट मंगवाई।

किशोर की बातें सही पाये जाने पर जज ने बालक रिहाई करते हुए इंटर की पढ़ाई का पूरा खर्च स्वम उठाने का जिम्मा लिया। बालक ने कोचिंग करने की भी इच्छा जताई थी इसका भी खर्च उठाने का जज ने जिम्मेदारी ली।

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सहायक अभियोजन पदाधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि 27 मई 2019 को दीपनगर थाना क्षेत्र के एक गांव में नाली विवाद को लेकर दो पक्षो में जमकर मारपीट हुई थी। इसी दौरान दीपनगर की स्थानीय पुलिस वहां पहुँच गई।

इसके पश्चात भागीरथ प्रसाद ने आरोपित दो भाइयों के अलावा 35 व्यस्को पर एफआईआर दर्ज कराई थी। इनमे दोनों आरोपित मौके वारदात पर मौजूद थे। जिन्हें पुलिस ने अरेस्ट कर जेल भेज दिया था।

साल 2019 में जब मामला किशोर न्याय परिषद के समक्ष आया तो पूछताछ के दौरान किशोर ने जज मिश्र से आगे की पढ़ाई के लिए जमानत देने की अर्जी दी। उस समय किशोर ने कोर्ट के समक्ष मैट्रिक परीक्षा में बेहतर अंक लाने का वादा किया था।

इसमें बालक ने कहा था कि अच्छा अंक नही लाने पर जमानत खारिज करते हुए मुझे कोर्ट का हर फैसला स्वीकार होगा। बालक ने 77 फीसदी अंक लाकर न।सिर्फ अपने वचन को पूरा किया बल्कि अन्य किशोरों के लिए प्रेरणा भी बन गया।

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