हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और उसकी हत्या के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को स्वत: संज्ञान लिया है। रामनवमी के कार्यक्रमों के दौरान हुई इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है। अदालत का यह हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब इस घटना को लेकर जिले में राजनीतिक बंद और व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस मामले पर संज्ञान लिया। हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर इस जघन्य अपराध की परिस्थितियों और अब तक की गई जांच पर जवाब मांगा है।
पीड़ित बच्ची विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्भा गांव की रहने वाली थी। 24 मार्च की रात वह अपनी मां के साथ गांव में ही आयोजित ‘मंगला’ जुलूस देखने गई थी। परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, जुलूस के दौरान ही बच्ची का अपहरण कर लिया गया। अगले दिन 25 मार्च की सुबह गांव के ही एक खेत में उसका शव बरामद हुआ।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा ने रविवार को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन की घोषणा की। इस SIT को मामले की त्वरित जांच करने और एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को हजारीबाग में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया। हालांकि प्रशासन के अनुसार दोपहर 2 बजे तक जिले में शांति बनी रही, लेकिन बंद का व्यापक असर देखने को मिला।
राज्य की राजधानी रांची में भी भाजपा महिला मोर्चा की सदस्यों ने प्रदर्शन कर पीड़िता के लिए न्याय की मांग की। मोर्चा की महासचिव सीमा सिंह ने वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि “राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है।”
हाईकोर्ट की निगरानी के बाद अब राज्य पुलिस पर इस मामले की पारदर्शी और समयबद्ध जांच पूरी करने का भारी दबाव है।

