झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में त्योहारों के दौरान बिना पूर्व सूचना और लंबी अवधि की बिजली कटौती को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है। विशेष रूप से 1 अप्रैल को मनाए गए सरहुल त्योहार के दौरान राजधानी समेत कई क्षेत्रों में घंटों तक बिजली बाधित रही, जिससे आम जनता को भारी असुविधा हुई।
मुख्य न्यायाधीश एम. एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) के खिलाफ लोकहित याचिका (PIL) दर्ज की। कोर्ट ने JBVNL को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि त्योहार के दिन दोपहर 1 बजे से रात 11 बजे तक बिजली की आपूर्ति बाधित रही, जिससे बुजुर्गों, बीमारों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों सहित सभी वर्गों को गंभीर परेशानी हुई।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बिजली कटौती से स्थानीय व्यापारियों को जबरन दुकानें बंद करनी पड़ीं, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि ऐसी अघोषित बिजली कटौती न केवल आम नागरिकों को परेशान करती है, बल्कि त्योहारों के दौरान आपात सेवाओं और सार्वजनिक सुरक्षा को भी खतरे में डालती है।

इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि JBVNL तब तक लंबी अवधि की बिजली कटौती न करे जब तक कि अत्यावश्यक परिस्थिति—जैसे कि खराब मौसम या प्राकृतिक आपदा—ना हो। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जुलूसों और सार्वजनिक आयोजनों के आयोजक सुरक्षा दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करें, विशेषकर झंडे के लिए ले जाए जाने वाले लंबे डंडों के संदर्भ में, जिससे बिजली आपूर्ति में कोई बाधा या दुर्घटना न हो।
कोर्ट ने झारखंड के महाधिवक्ता और JBVNL के अधिकारियों को 9 अप्रैल तक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताया जाए कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।