इंदिरा साहनी मामले में एक हफ्ते में राज्य हलफनामा दाखिल करें

नई दिल्ली—- 50 फीसदी आरक्षण सीमा तय करने के 1992 के ऐतिहासिक इंदिरा साहनी केस में आये निर्णय पर पुनर्विचार के लिए बड़ी पीठ के पास भेजे जाने की आवश्यकता है या नही, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस पर सुनवाई शुरू कर दी है।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय पीठ ने समस्त राज्यों को एफिडेविट दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का वक्त दिया है। 

गौरतलब है कि कुछ राज्यों ने समय दिए जाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं के पक्षकार अधिवक्ता अरविंद दातार ने केस को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा कि इंदिरा साहनी मामले पर फिर से गौर करने की कोई जरूरत नही है। यानी मंडल फैसले में तय किया गया था और उस मामले को दोबारा देखने के लिए 11 न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजना होगा और इसकी आवश्यकता नही है। 

सुप्रीम कोर्ट के गठन के बाद से मात्र पांच बार ऐसा हुआ जब 11 जजों की पीठ का गठन हुआ और यह आसाधारण और कई सांविधानिक महत्व के जरूरी मामलों पर हुआ है। यहाँ सवाल सिर्फ इतना है कि आरक्षण देने के लिए 50 प्रतिशत की जो सीमा तय है उसका उल्लंघन किया जा सकता है। 

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