बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका क्या है- बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका कैसे दायर करें? सैंपल ड्राफ्ट डाउनलोड करे

Habeas Corpus Writ in Hindi – ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’  (Habeas Corpus) शब्द लैटिन शब्दों से बना है । Habeas का अर्थ है ‘लेकर आओ’ और कॉर्पस का अर्थ है ‘शरीर’। इस प्रकार इस शब्द (Habeas Corpus) का शाब्दिक अर्थ है ‘शरीर लेकर आओ’।

बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) की रिट एक आदेश के रूप में जारी की जाती है जिसमें एक व्यक्ति को निर्देश दिया जाता है कि वह किसी उस व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष पेश करे और उस प्राधिकारी के न्यायालय को सूचित करे जिसके तहत वह उस व्यक्ति को हिरासत में ले रखा है।

यदि दिए गए कारण से पता चलता है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है, तो न्यायालय उसकी रिहाई का आदेश देगा। इस प्रकार, रिट का प्राथमिक लक्ष्य उस व्यक्ति को तत्काल उपचार प्रदान करना है जिसे किसी व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से बंधक बनाया गया है, चाहे वह जेल में हो या निजी हिरासत में।

कानू सान्याल बनाम जिला मजिस्ट्रेट, दार्जिलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि  बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के समय बंधी का कोर्ट के सामने होना जरूरी नहीं है। इस मामले में एक शीर्ष क्रम के नक्सली नेता कानू सान्याल को 1971 में पकड़ा गया था और विशाखापत्तनम जेल में बिना किसी आरोप के कैद किया गया था। 

कानू ने अपनी कैद की वैधता पर विवाद करते हुए अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अनुरोध किया कि अदालत में उनकी उपस्थिति की आवश्यकता के लिए एक आदेश जारी करे। कोर्ट ने नियम निसी का आदेश दिया लेकिन हिरासत में लिए गए व्यक्ति को पेश करने का आदेश नहीं दिया। न्यायमूर्ति भगवती ने फैसला सुनाया कि अनुच्छेद 32 के तहत बंदी प्रत्यक्षीकरण के एक रिट में, अदालत के समक्ष हिरासत में लिए गए व्यक्ति के शरीर को अदालत के लिए रिट याचिका को सुनने और तय करने की आवश्यकता नहीं थी।

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बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) रिट के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

सामान्य मानदंड के अनुसार, किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा आवेदन किया जा सकता है जिसे अवैध रूप से रखा गया है। हालाँकि, कुछ परिस्थितियों में, कोई भी कैदी की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर सकता है। व्यक्ति कोई भी हो सकता है, जैसे दोस्त या रिश्तेदार।

बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) रिट याचिका दायर करने के नियम:

उच्चतम न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट के आवेदन में अभिवचन के सख्त नियम का पालन नहीं करता है और न ही इस सवाल पर अनुचित जोर देता है कि सबूत का भार किस पर है। यहां तक ​​कि जेल से बंद किसी कैदी द्वारा लिखा गया पोस्टकार्ड भी अदालत को हिरासत की वैधता की जांच करने के लिए सक्रिय करने के लिए पर्याप्त होगा।  हिरासत के कानूनी होने का औचित्य साबित करने का भार हमेशा व्यक्ति को हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी पर रखा गया है।

तकनीकी और कानूनी आवश्यकताएं:

तकनीकी और कानूनी आवश्यकताएं अदालत के लिए कोई बाधा नहीं हैं, यहां तक ​​​​कि एक अनौपचारिक संचार को भी लिए एक कार्यवाही के रूप में बंदी प्रत्यक्षीकरण के रूप में स्वीकार किया जाता है यदि बुनियादी तथ्य पाए जाते हैं। 

सुनील बत्रा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण के रिट का उपयोग न केवल अन्यायपूर्ण रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्ति को रिहा करने के लिए किया जाएगा, बल्कि इसका उपयोग उसे जेल के अंदर बुरे उपचार से बचाने के लिए भी किया जाएगा। 

बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर कब विचार किया जा सकता है?

बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पे तब विचार  किया जाएगा यदि किसी व्यक्ति को कानून के विपरीत बंदी बना के रखा गया हो, परन्तु  अगर हिरासत को उचित ठहराया जाता है तो कोर्ट बंदी प्रत्यक्षीकरण स्वीकार नहीं करेगा। 

बंधीकरण को अवैध साबित करने की शर्तें:

क)   यदि किसी को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार बढ़ी नहीं बनाया गया है।

b)   नजरबंदी अनुच्छेद 22 के तहत उल्लिखित शर्तों का उल्लंघन करती है।

c) यदि बंदी बनाये गए व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया जाता है।

यदि किसी भी शर्त को पूरा किया जाता है, तो हिरासत/गिरफ्तारी अवैध होगी और गिरफ्तार व्यक्ति  रिहा होने का हकदार होगा।

बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) रिट याचिका कैसे दायर करें: 

बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) या सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) में दायर की जा सकती है। बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका दायर करने पर न्यायालय हिरासत में लिए गए व्यक्ति से यह जांचता है कि क्या उसे अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है। यह जांचने के बाद कि क्या अदालत को लगता है कि व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है तो कोर्ट बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका के तहत व्यक्ति को रिहा करने का आदेश दे सकती है।

 सैंपल ड्राफ्ट

बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका

…………….. उच्च न्यायालय

संवैधानिक रिट अधिकारिता सं. ……. ….. ……………… सन ……………..

के मामले में –

भारत के संविधान के अनुच्छेद के अधीन एक आवेदनपत्र और के मामले में –

बन्दी प्रत्यक्षीकरण और किसी अन्य समुचित रिट या रिटो में एक निर्देश आदेश या आदेशों और/ या रिट और के मामले में

……………………………. द्वारा पारित किया गया आदेश सं. …………… …………… दिनांकित होने वाला निरोध का संदिग्धार्थी आदेश और के मामले में –

अबक (नाम, वर्णन एवम् पता) ……………. ……………. ……………. ……………. ……………. …….याची

बनाम

[1] ……………. में मुख्य सचिव, ……………. की सरकार के जरिये…………… राज्य।

[2] जिला मजिस्ट्रेट …………..

[3] अधीक्षक ……………. कारागार ……………. ……………. ……………. ……………. ……………. प्रत्यर्थी

सेवा में

आदरणीय श्री …………… ………….. मुख्य न्यायमूर्ति और इस माननीय न्यायालय के उसके साथी न्यायाधीशगण :

याची की विनम्र याचिका अति सादर पूर्वक प्रदर्शित करता है- .

1. यह कि आपका याची भारतवर्ष का नागरिक एवम् उसका परिवर्णन है।

2. यह कि आपका याची …………… में तारीख …………….. को प्रत्यर्थी सं. 3 द्धारा पारित किये गये आदेश सं. ……. ……………. दिनांकित …………….. होने एक आदेश द्वारा तारीख …………….. ………. को गिरफ्तार और …………….. में कारागार में प्रत्यक्षी सं. 2 की अभिरक्षा में रखा गया।

3. निरोध दिनांकित …………… का कथित आदेश ……………. में लिप्त होने/उसको कारित करने के लिए …………….. आदेश के अधीन पारित किया गया। निरोध आदेश चिन्हाकित “क” उपाबद्ध किया गया।

4. यह कि आपका याची तारीख …………….. को कथित अधिनियम के अधीन निरोध के निम्नलिखित आधारों के साथ हस्तान्तरित किया गया (आधारों का उल्लेख करें) निरोध के आधार की एक प्रतिलिपि इस याचिका के साथ उपाबद्ध की जाती है और उपाबन्ध ‘ख’ के रूप में चिन्हांकित किया जाता है।

5. अभ्यावेदन किया गया लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया।

6. निरोध के आदेश तात्पर्यिंत आदेश एवम् निरोध के आधार द्वारा व्यथित और उससे होने वाले आपके याची को निम्नलिखित अन्य के बीच निम्नलिखित आधारों पर आपकी शरण लेनी पड़ती है –

आधार

a) (आधार का उल्लेख करें)

b) (आधार का उल्लेख करें)

c) (आधार का उल्लेख करें)

d) (आधार का उल्लेख करें)

e) (आधार का उल्लेख करें)

7. यह स्वच्छन्दता पर आपके याची को स्वतन्त्र करने के लिए प्रत्यर्थियों पर पदाधारी है और जब तक इसमें यथा निवेदित आदेश नहीं किये जाते है तब तक आपके याची की उपचार करने योग्य नहीं हानि.एवम् स्वतन्त्रता की क्षति होगी।

8. आपके याची के पास इसमें इसके पूर्व कोई अन्य विकल्प एवम् दावाकृत अनुतोष नहीं है, यदि मंजूर किया जाए तो पूर्ण प्रभावकारी अनुतोष प्रदान करेगा।

9. वादहेतुक उद्भूत होता है और मामले के अभिलेख इस आदरणीय न्यायालय की अधिकारिता के अन्दर पड़ी है।

प्रार्थना

यह आवेदनपत्र वास्तविक एवम् न्यायहित में है। अतएव, आपका याची विनम्रता पूर्वक, प्रार्थना करता है कि ‘योर लार्ड शिप’ जारी करने की कृपा करे

(क) बन्दी प्रत्यक्षीकरण की प्रकृति की रिट न्यायालय में आपके याची की शरीर को पेश करने के लिए प्रत्यर्थियों को समादेशित करते हुए जारी की जाए और उसको स्वतन्त्र कर दिया जाए।

(ख) कोई अन्य आदेश या आदेशों और / या निर्देश जिन्हें योर लार्ड शिप उपयुक्त एवम् उचित समझे जारी किया जाए।  और कर्तव्यबद्ध होने की दशा में आपका याची सदैव प्रार्थना करेगा।

याची

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