दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सा देखभाल, शिक्षा और अग्निशमन जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में और देरी नहीं की जानी चाहिए क्योंकि ऐसी देरी शालीमार बाग के निवासियों के व्यापक हितों के लिए नुकसानदेह होगी। कोर्ट ने सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान को हरी झंडी दिखाते हुए, अधिग्रहित भूमि पर रह रहे लगभग 100 कब्जेदारों को 30 मई, 2026 तक स्वेच्छा से जगह खाली करने का समय दिया है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करने वाले निजी कब्जेदारों के हितों को व्यापक जनहित और यातायात के सुचारू प्रवाह के सामने झुकना होगा।
यह कानूनी विवाद शालीमार बाग के हैदरपुर गांव में अधिग्रहित भूमि पर रह रहे लगभग 98 कब्जेदारों की ओर से सरोज नामक निवासी द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली सरकार द्वारा ‘रोड नंबर 320’ को चौड़ा करने के लिए चलाए जा रहे तोड़फोड़ अभियान से सुरक्षा की मांग की थी।
निवासियों का तर्क था कि कई परिवार दशकों से इस जमीन पर रह रहे हैं और बेदखल किए जाने पर वे बेघर हो जाएंगे। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि संबंधित भूमि का अधिग्रहण सरकार द्वारा बहुत पहले ही किया जा चुका है। अधिग्रहण को दी गई पिछली चुनौतियों को हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका था और सुप्रीम कोर्ट ने भी उन आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
याचिकाकर्ताओं ने अपनी लंबी रिहाइश का हवाला देते हुए तोड़फोड़ और बेदखली पर रोक लगाने की गुहार लगाई। उन्होंने दलील दी कि सरकार की सड़क विस्तार योजना से उनके आशियाने उजड़ जाएंगे।
वहीं, दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा, लीगल एड काउंसिल धीरज कुमार सिंह और स्टैंडिंग काउंसिल संजय कुमार पाठक पेश हुए। उन्होंने तर्क दिया कि सड़क को चौड़ा करना अनिवार्य है। सरकार ने जोर देकर कहा कि मौजूदा संकरी सड़क यातायात में बाधा डालती है और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एम्बुलेंस और दमकल गाड़ियों जैसे आपातकालीन वाहनों को पास के अस्पतालों और स्कूलों तक पहुंचने से रोकती है।
6 अप्रैल के अपने आदेश में, हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में देरी समुदाय के लिए नुकसानदेह है।
बेंच ने टिप्पणी की:
“बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विस्तार, विशेष रूप से चिकित्सा देखभाल, शिक्षा और अग्निशमन जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच से संबंधित परियोजनाओं में अब और देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ऐसी देरी शालीमार बाग के निवासियों के व्यापक हितों के लिए हानिकारक होगी।”
कोर्ट ने आगे कहा कि हालांकि कब्जाधारी लंबे समय से वहां थे, लेकिन उनके निजी हितों को जनता की व्यापक जरूरतों के आगे गौण होना होगा:
“इस कोर्ट का मत है कि सड़क को चौड़ा करने के काम में अब और देरी नहीं की जा सकती। निवासियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसमें किसी भी तरह से बाधा या रुकावट न पैदा हो।”
कोर्ट ने तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन निवासियों को दूसरी जगह जाने के लिए समय दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि कब्जेदारों को 30 मई, 2026 तक बेदखल नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा:
“उपरोक्त अवधि यानी 30 मई, 2026 की समाप्ति पर, प्रतिवादी (अधिकारी) रोड नंबर 320 के विस्तार के साथ आगे बढ़ने और सभी अतिक्रमणों तथा अनधिकृत निर्माणों को हटाने के लिए स्वतंत्र हैं।”
इसके अलावा, कोर्ट ने दिल्ली सरकार (GNCTD) को निर्देश दिया कि वह कब्जेदारों के अनुग्रह राशि (ex-gratia compensation) के अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और कानून के अनुसार उचित निर्णय ले। तोड़फोड़ से यह सुरक्षा इस शर्त पर दी गई है कि याचिकाकर्ता अधिकारियों के साथ सहयोग करेंगे।

