दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के ज़रिए कर्ज़ लेने वालों की निजता और डेटा संरक्षण के अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि याचिका “एक गंभीर चिंता” को दर्शाती है और निर्देश दिया कि आरबीआई 2025 की डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस के प्रवर्तन को लेकर उठाए गए कदमों का विस्तृत हलफनामा दायर करे। कोर्ट ने टिप्पणी की—“हम यह जानना चाहते हैं कि आप क्या कार्रवाई कर रहे हैं।”
यह याचिका हिमाक्षी भार्गव ने अधिवक्ता कुनाल मदान और मनवे सरावगी के माध्यम से दाखिल की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि आरबीआई की 2025 डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस के बावजूद कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) और उनसे जुड़ी डिजिटल ऐप्स:
- मोबाइल फोन के कॉन्टैक्ट लिस्ट और कॉल लॉग जैसी प्रतिबंधित जानकारियों तक पहुंच बना रही हैं
- अत्यधिक और असंगत व्यक्तिगत एवं डिवाइस-स्तरीय डेटा इकट्ठा कर रही हैं
- जबरन सहमति (coercive consent) वाले तंत्र लागू कर रही हैं, जिसमें उधारकर्ता को सेवा लेने के लिए व्यापक और गैर-परक्राम्य (non-negotiable) प्राइवेसी पॉलिसी स्वीकार करनी पड़ती है
याचिका में कहा गया, “डेटा संग्रहण की ये प्रथाएं असंगत हैं और KYC या क्रेडिट असेसमेंट जैसे वैध उद्देश्यों से इनका कोई सीधा संबंध नहीं है।” यह भी कहा गया कि ऐसी सहमति गाइडलाइंस की धारा 12 का उल्लंघन है।
हिमाक्षी भार्गव ने दावा किया कि उन्होंने नवंबर 2025 में आरबीआई को एक विस्तृत शिकायत दी थी जिसमें नियम उल्लंघन के स्पष्ट उदाहरण थे, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिज़र्व बैंक एक काउंटर एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दायर करे जिसमें यह बताया जाए:
- याचिका में लगाए गए आरोपों पर क्या रुख है
- 2025 की डिजिटल लेंडिंग गाइडलाइंस के उल्लंघन के मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की गई
- आगे ऐसे मामलों में क्या कदम उठाए जा रहे हैं
कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल दिशानिर्देश बनाना पर्याप्त नहीं, उनका पालन और प्रवर्तन सुनिश्चित करना ज़रूरी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता युगल जैन और टीना भी पेश हुए। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट, आरबीआई को निर्देश दे कि जो डिजिटल लेंडिंग संस्थाएं गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रही हैं, उनके खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई की जाए।
अब मामला आरबीआई के जवाब दाखिल करने के बाद अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा।

