दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को राजधानी में रैन बसेरों की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार को सख़्त निर्देश दिए कि वे ठिठुरती सर्दी से लोगों की रक्षा के लिए पर्याप्त और उपयुक्त सुविधाएं सुनिश्चित करें। अदालत ने अधिकारियों से “संवेदनशील होने” और तुरंत कार्रवाई करने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजसवी कारिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। पीठ ने कहा,
“हम उम्मीद करते हैं कि अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि रैन बसेरों में रहने वाले लोग इस कड़ाके की सर्दी से खुद को बचा सकें।”
यह मामला हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ — न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला — द्वारा मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद आया, जिसमें अस्पतालों में इलाज के इंतज़ार में मरीजों और उनके परिजनों को सड़कों पर ठिठुरते हुए दिखाया गया था। उस पीठ ने इसे “तत्काल कार्यकारी और न्यायिक हस्तक्षेप की ज़रूरत वाला मामला” बताते हुए इसे मुख्य न्यायाधीश की पीठ को भेजा।
सोमवार को हुई सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों से तीखे सवाल किए।
“आपने क्या किया? अगर हममें से किसी को एक रात वहां रहना पड़े, तो पता नहीं क्या होगा। संवेदनशील बनिए,” कोर्ट ने कहा।
जब पीठ ने कहा कि कुछ तो कीजिए, तो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी सहमति जताई और कहा,
“यह एक मानवीय समस्या है, जिसे ठीक से संभाला जाना चाहिए।”
कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए तय की है और अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि रैन बसेरों में ठंड से बचाव के लिए अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं।
यह मामला राष्ट्रीय राजधानी में कड़ाके की ठंड के बीच हजारों बेघर लोगों की स्थिति को लेकर अदालत की चिंता को दर्शाता है, जो केवल रैन बसेरों पर निर्भर रहते हैं। कोर्ट का यह हस्तक्षेप सरकारों की ज़िम्मेदारी तय करने और मानवीय गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

