भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने बिहार ओलंपिक संघ के मामलों के संचालन के लिए गठित एड-हॉक समिति को रद्द करने संबंधी एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने राज्य संघ को नोटिस जारी कर मामले की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की।
यह विवाद 24 फरवरी को पारित उस एकल पीठ के आदेश से उत्पन्न हुआ, जिसमें अदालत ने कहा था कि एड-हॉक समिति का गठन उचित परामर्श के बिना किया गया और बिहार ओलंपिक संघ को न तो कोई सूचना दी गई, न ही उन्हें फैसले के आधार पर अपनी बात रखने का अवसर मिला। आदेश में यह भी कहा गया कि राज्य संघ को तीन महीने के भीतर चुनाव कराना होगा।
सुनवाई के दौरान IOA के वकील ने यह विचार करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की कि क्या पूरे मामले की प्रक्रिया, जिसमें एक सदस्यीय तथ्यान्वेषण समिति का गठन भी शामिल है, को फिर से शुरू किया जाए। अदालत ने यह मांग स्वीकार करते हुए IOA को आवश्यक निर्देश प्राप्त करने और प्रस्तुत करने के लिए समय दिया।

कोर्ट ने बिहार ओलंपिक संघ की ओर से पेश अधिवक्ता नेहा सिंह को भी निर्देश दिया है कि वे IOA द्वारा प्रस्तावित पुनः प्रक्रिया शुरू करने के विचार पर अपने मुवक्किल से निर्देश लें।
बिहार ओलंपिक संघ ने IOA के इन फैसलों को चुनौती देते हुए कहा था कि तथ्यान्वेषण समिति की नियुक्ति और एड-हॉक समिति का गठन IOA अध्यक्ष द्वारा एकतरफा ढंग से किया गया, जो कि कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के खिलाफ था। संघ का कहना है कि उन्हें इन शिकायतों के बारे में न तो पहले से सूचित किया गया, न ही अपनी सफाई देने का अवसर दिया गया।
अब हाईकोर्ट तय करेगा कि IOA की अपील पर क्या कार्रवाई की जाए और क्या बिहार ओलंपिक संघ में हस्तक्षेप की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी।