एलगार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. आनंद तेलतुम्बड़े की विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी याचिका का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जोरदार विरोध किया है। एनआईए ने अपनी आपत्ति में कहा है कि तेलतुम्बड़े विदेश जाकर फरार हो सकते हैं और शरण लेने का प्रयास कर सकते हैं।
तेलतुम्बड़े ने पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नीदरलैंड और यूनाइटेड किंगडम जाने की अनुमति मांगी थी, जहां उन्हें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पर व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है।
एनआईए ने अपने हलफनामे में कहा कि तेलतुम्बड़े, जो फिलहाल जमानत पर हैं, माओवादी और नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि उनके व्याख्यान ऑनलाइन भी दिए जा सकते हैं, इसलिए उनके शारीरिक रूप से विदेश यात्रा की कोई आवश्यकता नहीं है।

हलफनामे में एनआईए ने लिखा, “यह आशंका बलवती है कि यदि आरोपी को विदेश जाने की अनुमति दी जाती है, तो वह फरार होकर इन विदेशी देशों में शरण ले सकता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और मुकदमे से बच सके।” साथ ही कहा गया, “विदेश में शरण लेने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
वहीं तेलतुम्बड़े के वकीलों ने दलील दी कि वे डॉ. आंबेडकर, दलित आंदोलन, जाति प्रश्न, लोक नीति और भारत में लोकतांत्रिक अधिकारों के विषय में एक प्रतिष्ठित विद्वान हैं। याचिका में उल्लेख किया गया है कि उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से आमंत्रण प्राप्त हुआ है, जिनमें एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय में चार सप्ताह का कार्यक्रम भी शामिल है, जहां वे सेमिनार, व्याख्यान और पीएचडी छात्रों के साथ संवाद करेंगे।
इसके अलावा याचिका में नीदरलैंड के लाइडन विश्वविद्यालय और यूनाइटेड किंगडम के नॉटिंघम ट्रेंट विश्वविद्यालय से भी आमंत्रणों का विवरण दिया गया है, जहां उन्हें स्कॉलर-इन-रेजिडेंस के रूप में आमंत्रित किया गया है।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ए. एस. गडकरी ने कहा कि यह मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा गया है और निर्देश दिया कि तेलतुम्बड़े की याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।