दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राजधानी में पेडिग्री कुत्तों की कथित “बेतहाशा अवैध ब्रीडिंग” के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए दिल्ली एनिमल वेलफेयर बोर्ड (DAWB) को निर्देश दिया कि वह अब तक उठाए गए कदमों की एक ताज़ा और विस्तृत रिपोर्ट शपथपत्र के रूप में दाखिल करे।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस मामले में नगर निगम (MCD) और दिल्ली पुलिस को भी उत्तरदाता (रिस्पॉन्डेंट) बनाया और उनसे भी जवाब दाखिल करने को कहा।
पीठ ने कहा, “यह याचिका बहुत समय से लंबित है, अब इसे समाप्त किया जाना चाहिए।” अदालत ने DAWB को निर्देश दिया कि वह याचिका में उठाए गए मुद्दों के संबंध में की गई कार्रवाई का विवरण एक ताजा हलफनामे में दे।
यह याचिका 2018 में पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलखी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप है कि दिल्ली में पेडिग्री कुत्तों की ब्रीडिंग अवैध रूप से बड़े पैमाने पर की जा रही है और इससे संबंधित ब्रीडर नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि ब्रीडिंग के लिए रखे गए कुत्तों को अमानवीय परिस्थितियों में रखा जाता है और उनसे हर साल दो बार गर्भधारण कराया जाता है। इसके अलावा, पिल्लों को बिना दूध छुड़ाए ही बेच दिया जाता है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और वे कम उम्र में बीमारियों के कारण मर जाते हैं।
यह भी कहा गया है कि इन पिल्लों को बिना नसबंदी के बेचने के कारण दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या भी बढ़ रही है।
याचिका में निम्नलिखित निर्देश देने की मांग की गई है—
- दिल्ली एनिमल वेलफेयर बोर्ड द्वारा ब्रीडिंग केंद्रों का निरीक्षण
- अवैध ब्रीडरों पर कार्रवाई
- सभी ब्रीडिंग गतिविधियों को नियमों के अनुसार नियंत्रित करना
- भारतीय नस्ल के कुत्तों को अपनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना
अदालत अब DAWB, MCD और दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामों के आधार पर आगे सुनवाई करेगी। अदालत इस बात की जांच करेगी कि याचिका में उठाए गए गंभीर मुद्दों पर सरकारी एजेंसियों ने क्या कदम उठाए हैं।
यह मामला राजधानी में जानवरों के अधिकार, पालतू व्यापार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अदालत की निगरानी में उठाया गया एक अहम प्रयास है।

