पीएफआई पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिका की सुनवाई में केंद्र के रुख पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगा दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट 14 जुलाई को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा पांच साल के प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए प्रारंभिक आपत्तियों, विशेष रूप से याचिका की स्वीकार्यता (मेनटेनेबिलिटी) पर विचार करेगा।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने गुरुवार को कहा कि इस मामले में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने की आवश्यकता है। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई की तारीख पर याचिका की स्वीकार्यता के प्रश्न पर निर्णय लिया जाएगा।

PFI ने 21 मार्च 2024 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम [UAPA] ट्रिब्यूनल द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केंद्र सरकार के 27 सितंबर 2022 के आदेश को सही ठहराया गया था। इस आदेश के तहत PFI और उससे जुड़ी कई संगठनों को प्रतिबंधित किया गया था।

PFI की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि यह याचिका पहले ही 14 बार सूचीबद्ध हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसमें कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं हुआ है। उन्होंने केंद्र को नोटिस जारी करने और उसका जवाब दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की।

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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है क्योंकि ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता एक मौजूदा हाईकोर्ट के न्यायाधीश कर रहे थे और ऐसे में इस आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती।

राजू ने यह भी कहा कि प्रतिवादी की ओर से की गई मौखिक मांग पर नोटिस जारी नहीं किया जा सकता और याचिका पर पहले यह तय होना चाहिए कि वह विचारणीय है या नहीं।

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गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने PFI को और उसके विभिन्न सहयोगी संगठनों — जैसे कि Rehab India Foundation (RIF), Campus Front of India (CFI), All India Imams Council (AIIC), National Confederation of Human Rights Organisation (NCHRO), National Women’s Front, Junior Front, Empower India Foundation और Rehab Foundation, Kerala — को “गैरकानूनी संगठन” घोषित किया था।

अब हाईकोर्ट यह तय करेगा कि ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाली यह याचिका संवैधानिक रूप से स्वीकार्य है या नहीं। इसके बाद ही मामले में आगे सुनवाई की जाएगी।

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