दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदूषण के बीच कार-बाइक स्टंट फेस्टिवल पर दाखिल याचिका पर जिलाधिकारी को जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को दक्षिण-पूर्वी जिले के जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि वह ओखला स्थित एनएसआईसी ग्राउंड में 17 जनवरी को होने वाले ‘Burnout City’ नामक कार और बाइक स्टंट फेस्टिवल के खिलाफ दायर जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर यथाशीघ्र निर्णय लें।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल मामले के गुण-दोष में प्रवेश नहीं किया, लेकिन कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा 4 जनवरी को की गई अभ्यRepresentation का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी उपयुक्त निर्णय लें।

सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता के दावों पर असंतोष जताया और कहा कि स्टंट प्रदर्शन से प्रदूषण बढ़ने के समर्थन में कोई वैज्ञानिक आंकड़ा या अध्ययन प्रस्तुत नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इस कार्यक्रम में गाड़ियों द्वारा स्टंट किए जाएंगे जिससे अधिक ईंधन जलेगा और इससे वायु प्रदूषण और बढ़ेगा।

पीठ ने टिप्पणी की, “क्या आपके पास कोई डेटा है? याचिका आपके कयासों पर आधारित लगती है। आपने कोई वैज्ञानिक आधार नहीं दिया है। आप केवल इसलिए अनुमान लगा रहे हैं क्योंकि हाई RPM पर वाहन अधिक पेट्रोल खर्च करते हैं।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने न तो वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), जो दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू करता है, को पक्ष बनाया है और न ही दिल्ली सरकार के स्थायी वकील को याचिका की कॉपी दी है।

कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को याचिका की कॉपी नहीं दी गई। आप इतनी लापरवाही और गैर-गंभीरता से याचिका क्यों दायर करते हैं? आयोग को भी पक्षकार नहीं बनाया गया है।”

कोर्ट ने कहा, “हम याचिका के गुण-दोष में जाए बिना यह निर्देश देते हैं कि दक्षिण-पूर्व जिला मजिस्ट्रेट याचिका में उठाए गए मुद्दों, विशेष रूप से 4 जनवरी को दिए गए अभ्यRepresentation पर विचार करते हुए उचित निर्णय लें।”

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बता दें कि ‘Burnout City’ एक ऑटोमोबाइल शो है जिसमें कार और बाइक स्टंट्स किए जाते हैं। राजधानी की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए इस आयोजन पर सवाल उठाए गए हैं। अब आयोजन से जुड़ी आपत्तियों पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन को लेना है।

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