दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के सांसद अब्दुल राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशिद को संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति देते हुए निर्देश दिया कि वह यात्रा और सुरक्षा व्ययों के लिए जेल प्रशासन के पास 4 लाख रुपये जमा करें। न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी की पीठ ने यह अनुमति 4 अप्रैल तक “कस्टडी में रहते हुए” दी, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की इस चिंता को खारिज कर दिया कि राशिद फरार हो सकते हैं।
राशिद के वकील ने कोर्ट को बताया कि 1.45 लाख रुपये पहले ही जमा किए जा चुके हैं और शेष 2.55 लाख रुपये अगले तीन दिनों में जमा कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरी राशि जमा होने के बाद राशिद को विधायी कर्तव्यों के निर्वहन हेतु संसद ले जाया जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि वह अपने पहले दिए आदेश की मंशा को कमजोर नहीं करना चाहता, जिसके तहत राशिद को संसद में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने तय किया कि कुल 8.74 लाख रुपये के अनुमानित खर्च में से कम से कम 50 प्रतिशत राशिद को जमा करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

याचिका में कहा गया कि जेल प्रशासन ने प्रतिदिन लगभग 1.45 लाख रुपये का खर्च बताया है, जो छह दिनों में कुल 8.74 लाख रुपये बनता है। राशिद ने इस खर्च को “अत्यधिक” बताते हुए कहा कि यह उनके संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन में बाधा है और उन्हें इसे वहन करने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ सकता है।
NIA ने याचिका का विरोध करते हुए इसे “कानून का गंभीर दुरुपयोग” बताया। हालांकि, कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि राशिद को plain-clothed पुलिसकर्मियों की निगरानी में जेल से संसद और वापस ले जाया जाए, और इसका खर्च वह स्वयं वहन करेंगे। यह व्यवस्था 26 मार्च से 4 अप्रैल तक के लोकसभा सत्र के लिए है।
राशिद वर्तमान में 2017 के एक टेरर फंडिंग मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत ट्रायल का सामना कर रहे हैं। उन्होंने पहले संसद में भाग लेने के लिए कस्टडी पैरोल या अंतरिम जमानत की मांग की थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने 10 मार्च को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने संशोधित याचिका दायर कर “कस्टडी में रहते हुए” भाग लेने की अनुमति मांगी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
NIA ने आशंका जताई थी कि राशिद संसद के मंच का इस्तेमाल अपने विचारों के प्रचार के लिए कर सकते हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि संसद की कार्यवाही और अनुशासन बनाए रखने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास है।
गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्हें सितंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए अस्थायी जमानत मिली थी।