दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि वह रोहिणी स्थित आशा किरण शेल्टर होम की मौजूदा स्थिति पर दो महीने के भीतर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। यह आदेश 2024 में इस संस्थान में 14 मानसिक रूप से दिव्यांग निवासियों, जिनमें एक बच्चा भी शामिल था, की मौत के बाद दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कार्या की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि आशा किरण में रह रहे 700 से अधिक सभी निवासियों की एक योग्य डॉक्टर द्वारा पूर्ण चिकित्सा जांच की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें दवाएं भी दी जाएं।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संस्थान में डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन पीठ ने जमीनी हकीकत पर चिंता जताई। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “सब कुछ मौजूद है, इसमें कोई विवाद नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही है।”
कोर्ट ने आदेश दिया कि शेल्टर होम की इमारत की स्थिति पर तकनीकी ऑडिट कराया जाए। आदेश में कहा गया, “हम उचित समझते हैं कि उत्तरदाताओं को निर्देशित किया जाए कि वे आशा किरण शेल्टर होम की भवन संबंधी स्थिति और निवासियों के शारीरिक व स्वास्थ्य विवरण पर आधारित एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी पूरी तरह से की गई मेडिकल जांच पर आधारित होनी चाहिए।”
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि वह शेल्टर होम के स्टाफ की स्वीकृत संख्या, वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों और खाली पदों की जानकारी भी रिपोर्ट में दे।
यह आदेश ‘समाधान अभियान’ नामक एनजीओ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसमें जुलाई 2024 में 14 निवासियों की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने की मांग की गई थी।
इससे पहले, कोर्ट ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग के सचिव को निर्देश दिया था कि वह आशा किरण में स्टाफ की भर्ती, विशेष रूप से डॉक्टरों की नियुक्ति, को लेकर तत्परता से कार्यवाही करें।
अब इस मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होगी।

