सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतों का अंबार, कानून मंत्री ने बताया- 10 सालों में मिलीं 8,600 से ज्यादा शिकायतें

न्यायिक जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़े एक अहम सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने शुक्रवार (13 फरवरी, 2026) को लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन को सूचित किया कि पिछले एक दशक में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को पदस्थ जजों (Sitting Judges) के खिलाफ कुल 8,630 शिकायतें प्राप्त हुई हैं।

यह जानकारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद वी.एस. माथेश्वरन द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सामने आई। आंकड़ों से स्पष्ट है कि हाल के वर्षों में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ शिकायतों की संख्या में भारी उछाल आया है, जिसमें वर्ष 2024 और 2025 में रिकॉर्ड मामले दर्ज किए गए हैं।

शिकायतों का बढ़ता ग्राफ

डीएमके सांसद ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ भ्रष्टाचार, यौन दुराचार और अन्य गंभीर कदाचार से संबंधित शिकायतों का विस्तृत ब्यौरा मांगा था। इसके जवाब में कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने वर्षवार डेटा साझा किया, जो शिकायतों के पैटर्न में उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।

सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:

  • शुरुआती दौर (2016-2019): साल 2016 में 729 शिकायतें मिलीं, जो 2017 में थोड़ी घटकर 682 हो गईं। हालांकि, इसके बाद इसमें वृद्धि देखी गई और 2018 में यह संख्या 717 और 2019 में 1,037 तक पहुंच गई।
  • महामारी का दौर (2020-2021): वर्ष 2020 में शिकायतों में गिरावट आई और यह 518 रह गईं, जबकि 2021 में 686 शिकायतें दर्ज की गईं।
  • हालिया उछाल: वर्ष 2022 से शिकायतों की संख्या में फिर से तेजी आई है। 2022 में CJI कार्यालय को 1,012 शिकायतें मिलीं, 2023 में 977, और पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा अपने चरम पर रहा— 2024 में 1,170 और 2025 में 1,102 शिकायतें प्राप्त हुईं।
READ ALSO  सुप्रीम कोर्ट ने सूरत एपीएमसी भूमि दुरुपयोग में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप का समर्थन किया, इसे 'घोटाला' बताया

‘इन-हाउस प्रक्रिया’ ही एकमात्र रास्ता

सांसद माथेश्वरन ने यह भी जानना चाहा था कि क्या सरकार के पास उच्च न्यायपालिका के जजों के खिलाफ शिकायतों को ट्रैक करने या उन पर कार्रवाई करने के लिए कोई विशेष प्रणाली है।

इस पर मंत्री मेघवाल ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में न्यायपालिका “इन-हाउस प्रक्रिया” (In-House Procedure) के तहत कार्य करती है। इस व्यवस्था के अनुसार, पदस्थ जजों के खिलाफ शिकायतों को सुनने और उन पर कार्रवाई करने का अधिकार केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के पास है।

मंत्री ने बताया कि CPGRAMS या अन्य सरकारी चैनलों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को केवल संबंधित अधिकारियों (CJI या हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रसारित कर दिया जाता है।

READ ALSO  हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने स्थानीय वकीलों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का आग्रह किया

भले ही सरकार ने शिकायतों की संख्या उजागर कर दी हो, लेकिन इन पर क्या कार्रवाई हुई, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। सांसद ने विशेष रूप से पूछा था कि क्या इन शिकायतों के आधार पर कोई दंडात्मक या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन मंत्री के लिखित जवाब में इस पहलू पर कोई जानकारी नहीं दी गई।

इसके अलावा, सरकार ने इस सवाल का भी कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि क्या जजों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए उचित दस्तावेजीकरण, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु कोई नए दिशानिर्देश लाने की योजना है। मौजूदा रुख यही दर्शाता है कि न्यायिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए इन मामलों को न्यायपालिका के आंतरिक तंत्र पर ही छोड़ा गया है।

READ ALSO  बड़ी खबर, सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान करने वाले पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर पुलिस हिरासत में
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles