सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लुधियाना के एक होजरी व्यापारी द्वारा दाखिल उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया था। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका के “स्क्रिप्टेड” होने पर कड़ी नाराजगी जताई और याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की तुच्छ याचिकाएं दाखिल करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह मामला लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी रजनीश सिद्धू द्वारा सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई एक जनहित याचिका से जुड़ा था, जिसमें ‘PM CARES फंड’ को लेकर हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान मुख्य कानूनी मुद्दा याचिका की विषय-वस्तु से हटकर उसके लेखकत्व (authorship) और ईमानदारी पर केंद्रित हो गया। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि क्या कोई याचिकाकर्ता ऐसी याचिका को बरकरार रख सकता है जिसके तकनीकी कानूनी शब्दों को समझने या समझाने में वह पूरी तरह असमर्थ हो।
मामले की पृष्ठभूमि
रजनीश सिद्धू, जो 12वीं पास हैं, CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। जैसे ही सिद्धू ने अपनी दलीलें पढ़ना शुरू किया, पीठ को संदेह हो गया। कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ता की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और याचिका में इस्तेमाल की गई अत्यंत कठिन और अकादमिक भाषा के बीच कोई मेल नहीं था। जब CJI ने उनके अदालती इतिहास के बारे में पूछा, तो सिद्धू ने दावा किया कि यह उनकी पहली याचिका है और वह सीधे लुधियाना से यहां आए हैं।
कोर्ट का विश्लेषण और मौखिक टिप्पणियां
CJI ने याचिकाकर्ता के दावों पर कटाक्ष करते हुए कहा, “बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलके आ गए।” याचिका की प्रामाणिकता परखने के लिए CJI ने कहा, “मैं यहीं आपका अंग्रेजी का इम्तिहान लूंगा। अगर आप इसमें 30 फीसदी नंबर भी ले आए, तो मैं मान लूंगा कि यह याचिका आपने ही ड्राफ्ट की है।”
सुनवाई के दौरान सबसे नाटकीय मोड़ तब आया जब कोर्ट ने सिद्धू से याचिका में इस्तेमाल हुए शब्द “Fiduciary Risk of Corporate Donors” (कॉरपोरेट डोनर्स का फिड्यूशरी रिस्क) का अर्थ पूछा। सिद्धू इसका उत्तर नहीं दे सके और अपने नोट्स पढ़ने की कोशिश करने लगे।
इस पर हस्तक्षेप करते हुए CJI ने कहा:
“मिस्टर सिद्धू, यह किसी वकील ने लिखकर आपको दिया है। आप सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ रहे हैं।”
कोर्ट ने शुरू में किसी वकील की संलिप्तता का संदेह जताया और पंजाब सतर्कता ब्यूरो से जांच कराने की चेतावनी भी दी। इस पर सिद्धू ने पहले दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के एक टाइपिस्ट ने उनकी मदद की थी, जिसे उन्होंने “चार जैकेट” उपहार में दी थीं और ₹1,000 प्रति घंटे का भुगतान किया था।
AI के इस्तेमाल की स्वीकारोक्ति
गहन पूछताछ के बाद, सिद्धू ने अंततः स्वीकार किया कि उन्होंने याचिका तैयार करने के लिए तीन से चार AI टूल्स का उपयोग किया था, क्योंकि वह वकील का खर्च नहीं उठा सकते थे। इस स्वीकारोक्ति के बाद पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यह याचिका वास्तविक कानूनी शोध या शिकायत पर आधारित नहीं थी।
CJI सूर्यकांत ने व्यापारी को अपने व्यवसाय पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा:
“जाओ, लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो… जिन लोगों का काम है ऐसी याचिका फाइल करना, वो नुकसान कर देंगे आपका कॉस्ट लगवा के।”
कोर्ट का निर्णय
पीठ ने जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोर्ट का कीमती समय उन याचिकाओं पर बर्बाद नहीं किया जा सकता जो बिना कानूनी समझ के स्वचालित उपकरणों (automated tools) के माध्यम से तैयार की गई हों। कोर्ट ने सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी किसी भी “तुच्छ” या “स्क्रिप्टेड” याचिका पर दंडात्मक और वित्तीय परिणाम भुगतने होंगे।
उल्लेखनीय है कि इसी पीठ ने सोमवार को भी पांच “तुच्छ” याचिकाओं को खारिज किया था, जिनमें से एक में प्याज और लहसुन में “तामसिक” ऊर्जा होने पर वैज्ञानिक अध्ययन की मांग की गई थी।

