इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- भारत चंद्रयान भेज रहा है और अधिकारी हस्तलेख में ऐसा आदेश पारित कर रहे हैं जो पढ़ा ही नहीं जा सकता

कल इसरो ने भारत का तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 जीएसएलवी मार्क 3 हेवी-लिफ्ट लॉन्च वाहन, जिसका नाम ‘बाहुबली’ रॉकेट है, पर श्रीहरिकोटा से दोपहर 2.35 बजे लॉन्च किया।

लगभग उसी समय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल न्यायाधीश पीठ चकबंदी, जौनपुर के उप निदेशक द्वारा पारित आदेश के खिलाफ एक मामले की सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट ने कहा:

न्यायालय इस बात से आश्चर्यचकित है कि 21वीं सदी में, जब भारत ‘चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग’ की प्रक्रिया में है, चकबंदी, जौनपुर के उप निदेशक ने अपनी हस्तलिखित में एक छोटा सा विवादित आदेश पारित किया है, जो बिल्कुल पढ़ने योग्य नहीं है, जबकि अन्य विकल्प उपलब्ध हैं जैसे कि कंप्यूटर या वॉयस टाइपिंग का उपयोग करना, हालाँकि, अधिकारी ने इसका उपयोग नहीं किया है।

कोर्ट में मौजूद कुछ वकीलों से आदेश पढ़ने के लिए भी कहा गया, लेकिन कोई भी इसे पढ़ नहीं सका।

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अपवादस्वरूप न्यायालय ने न्यायालय के आदेश में ही चुनौती दिये गये आदेश की स्कैन प्रति भी संलग्न कर दी।

अदालत ने कहा:

प्रतिद्वंद्वी पक्षों की ओर से पेश होने वाले विद्वान वकील, यहां तक कि अदालत में मौजूद बार के सदस्य भी, पूरे आदेश को सही ढंग से पढ़ने में सक्षम नहीं हैं।

इसलिए, न्यायालय ने चकबंदी, जौनपुर के उप निदेशक को एक आदेश पारित करने का निर्देश दिया, जो स्पष्ट हस्तलिखित या कंप्यूटर टाइपिंग द्वारा सुपाठ्य होगा।

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उपरोक्त प्रक्रिया तीन सप्ताह की अवधि के भीतर की जाएगी और उसके बाद याचिकाकर्ता को उसकी एक प्रमाणित प्रति निःशुल्क प्रदान की जाएगी, जिसे तीन सप्ताह के बाद न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।

अदालत ने इस आदेश की प्रति चकबंदी आयुक्त, लखनऊ, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उप निदेशक चकबंदी, जौनपुर को भी भेजने का निर्देश दिया।

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